हिंदू कोड-जारी - Page 453

438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर : मैं यही करने की कोशिश कर रहा हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : इस परिभाषा को शामिल करके? यदि यही विशिष्ट प्रयोजन है तो मेरा संशोधन अनावश्यक है।

उपाध्यक्ष महोदय : मूलतः जो लोग आलिया संतान अधिनियम और मरूमक्कट्टयम कानून द्वारा नियंत्रित थे, उन्हें बाहर रखा गया था और उन्हें दोनों कानूनों से विनियमित होने की इजाजत दी गई थी। माननीय विधि मंत्री अब यह महसूस करते हैं कि उन्हें भी इस अधिनियम के कार्य ढ़ाचे के भीतर लाया जाना चाहिए ताकि एकरूपता बनाई जा सके। इसीलिए वे इसे जोड़ रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरी उलझन इस बात को लेकर है कि इस परिभाषा के बावजूद वे सामान्यतः इसमें शामिल रहेंगे।

उपाध्यक्ष महोदय : विधेयक में उन्हे विशेष रूप से अलग रखा गया है।

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य इस गलतफहमी में थे कि उन्हें मूलतः शामिल किया गया था और विधि मंत्री उन्हें हटाना चाहते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : अपवर्जन सामान्य खंड में संशोधन करके किया जाना चाहिए; न कि परिभाषा में।

उपाध्यक्ष महोदय : वह और मामला है। दरअसल, माननीय सदस्य के संशोधन में कोई दम नहीं है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मै बिल्कुल सहमत हूँ।

उपाध्यक्ष महोदय : तब वह औपचारिक मामलों और मौखिक संशोधनों पर ध्यान क्यों देते हैं। यदि यह आवश्यक है तो क्यों न इस परिभाषा को हम किसी सामान्य

खंड अधिनियम में डालने के बजाए स्पष्टीकरण के रूप में रखें।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : सामान्य खंड अधिनियम में नहीं, बल्कि इस अधिनियम के तहत हिंदुओं की सामान्य परिभाषा को। यह सभी हिंदुओं पर लागू होनी चाहिए। आलिया संतान कानून हिंदुओं को नियंत्रित करता है। यह विशेष उल्लेख है और फिर इसे शामिल किया गया है। जबकि यह पहले से ही शामिल है।

उपाध्यक्ष महोदय : इस आपत्ति की रीढ़ ही टूटी हुई है। माननीय सदस्य किसी औपचारिक मामले की बात कर रहे हैं। क्या यह जरूरी है?

गृह मंत्री (श्री राजगोपालाचारी) : मेरा ख्याल है कि माननीय सदस्य को

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