440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अतः चयन समिति द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक के अन्तर्गत जहां तक मरूमक्कट्टयम कानून द्वारा नियंत्रित व्यक्तियों का संबंध है इसका अनुप्रयोग जारी रखा गया है। माननीय विधि मंत्री चाहते हैं कि किसी वर्ग विशेष के पक्ष में कोई छूट न दी जाए बल्कि सभी को इस अधिनियम के दायरे के भीतर लाया जाए। डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
उपाध्यक्ष महोदय : श्री नजीरुद्दीन अहमद भी यही चाहते हैं पहले उनका ख्याल था कि कोई छूट दी जा रही है। उनका ख्याल था कि जो मरूमक्कट्टयम कानून और आलिया संतान कानून द्वारा नियंत्रित थे वे इस कोड द्वारा भी नियंत्रित थे और माननीय कानून मंत्री छूट देना चाहते थे, और इसी पर उन्हें आपत्ति थी। अब चूँकि वे जान गए हैं कि मूल अधिनियम में छूट दी गई थी और उन्हें इसके अन्तर्गत लाया जा रहा है, इसलिए वे अपना एतराज वापस लेते है, लेकिन वे इस बात को पकड़े हुए हैं - मैं इन शब्दों को वापस लेता हूँ - वे मरूमक्कट्टयम और आलिया संतान कानून के बारे में एक औपचारिक बात उठाना चाहते हैं अब यह विषय चला गया है। उन्हें इन औपचारिक बातों की चिन्ता क्यों होनी चाहिए?
श्री नजीरुद्दीन अहमद : खंड 51 को हटाया जाना चाहिए। इतना ही पर्याप्त होगा।
उपाध्यक्ष महोदय : यह एक प्रक्रिया संबंधी मामला है।
डॉ. अम्बेडकर : हम उस पर बाद में आएंगे।
उपाध्यक्ष महोदय : हम उस पर बाद में आएंगे।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : इन सभी लोगों के लिए इस विधेयक में विशेष प्रावधान है। इन्हें हटाया जाना चाहिए। परिभाषा को भी हटाया जाना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय : इसे स्पष्ट कर देने में कोई नुकसान नहीं है।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह तो अपनी नाक सीधी नहीं लेकिन घुमाकर पकड़ने जैसा होगा।
उपाध्यक्ष महोदय : आलिया संतान कानून कोई सामान्य कानून नहीं है, जिसमें रीति-रिवाजों और दूसरी बातों का ब्यौरा दिया गया हो। यह तो एक संहिता है।
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यदि आलिया संतान अधिनियम का कोई उल्लेखनीय प्रावधान बीच में नहीं आता