हिंदू कोड-जारी - Page 456

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है तो हम इस पर फिर आ सकते है, यदि यह फिजूल है। बेहतर होगा यदि हम परिभाषा से शुरूआत करें, क्योंकि कुछेक प्रावधानों में इसका संदर्भ दिया गया है।

उपाध्यक्ष महोदय : मैं समझता हूँ कि माननीय सदस्य श्री नजीरुद्दीन अहमद को इसकी कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। दरअसल, उनकी बात माननीय विधि मंत्री के संशोधन के माध्यम से प्रस्तुत कर दी गई है। इसलिए श्री नजीरुद्दीन अहमद के नाम जितने भी संशोधन हैं, उन्हेंं प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। श्री नजीरुद्दीन अहमद : जी, नहीं; जी नहीं।

उपाध्यक्ष महोदय : संशोधन 372 एक औपचारिक संशोधन है। इसकी पुनः संख्यांकन की जिम्मेवारी मैं ले लूँगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : संशोधन 410 पर जोर नहीं दिया गया है।

उपाध्यक्ष महोदय : इसके बाद संशोधन 374 तथा 375 है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं संशोधन 374 पर जोर देता हूँ। परन्तु मेरा संशोधन सं. 377 पहले आता है।

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य इसे प्रस्तुत कर सकते हैं। जहां तक कोष्ठकों आदि के साथ औपचारिक संशोधनों का प्रश्न है, मैं उनके संबंध में कार्यालय को निर्देश दे दूँगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : अब मैं और कोई संशोधन प्रस्तुत नहीं करूंगा। इतना ही काफी है। मैं संशोधन सं. 377 प्रस्तुत करता हूँ।

पंडित ठाकुर दास भार्गव (पंजाब)ः क्या मैं यह मान लूँ कि आपने उप-खंड ( i ) को पूरा कर लिया है? मेरा एक संशोधन है।

उपाध्यक्ष महोदय : पहले मुझे पहला खंड समाप्त करने दें।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मुझे कोई आपत्ति नहीं है यदि श्री नजीरुद्दीन अहमद अपने सभी संशोधनों को पहले पेश करने का दावा करते हों।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह कोई दावा नहीं है; ऐसा करना सुविधाजनक होगा।

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया पहले मुझे खंड 3 के उप-खंड ( i ) को निपटा लेने दें।