444 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : मुझे भ्रम होता है कि खंडों के इन भागों या मदों के बारे में बात करते समय क्या ”उप-खंड “ का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के मामलों में हम मदों की बात करते है। उन्हे मद सं. 1, मद सं. 2 इत्यादि कहा जाता है। इन
खंडों के कोई उप-खंड नहीं हैं। अतः कृपया उन्हें प्रविष्टियां या मदें कहा जाए।
उपाध्यक्ष महोदय : यहां खंड हैं और फिर उनके उप-खंड हैं, अतः मैं........
श्री संथानम : जी, नहीं। उप-खंडों को क्रम संख्याएं दी गई हैं, जैसा कि आम -तौर पर किया जाता है।
डॉ. अम्बेडकर : कुछ भी शब्द अपना लिया जाए लेकिन बेहतर होगा कि “उप
खंड ’’ शब्द का प्रयोग न किया जाए।
उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है मैं ”प्रविष्टि“ अथवा “भाग” शब्द का प्रयोग करूंगा। अब श्री झुनझुनवाला ”जाति“ शब्द को “वर्ण” में बदलकर, जैसा कि विधि मंत्री ने कल सुझाव दिया था, अपने संशोधन में बदलाव करना चाहते हैं।
श्री झुनझुनवाला : मैं अनुरोध करता हूँ कि :
भाग ( i ) में ”जनजाति“ शब्द के बाद ”वर्ण” शब्द को अंतःस्थापित किया जाएगा।
मैं मामूली संशोधन के साथ ”मुख्य जातियों“ शब्द के बाद आने वाले शब्दों का लोप करते हुए अपना संशोधन सं. 414 भी प्रस्तुत करना चाहूँगा, मैं अनुरोध करता हूँ कि :
भाग ( i ) के बाद निम्नलिखित नए भाग को अंतःस्थापित किया जाएगा :
( i क) “वर्ण” शब्द से प्रत्येक मामले में संदर्भ के अनुसार चार मुख्य जातियां अभिप्रेत हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तुत संशोधन इस प्रकार है :
भाग ( i ) के बाद निम्नलिखित नए भाग को अंतःस्थापित किया जाएगा :
( i क) “वर्ण” शब्द से प्रत्येक मामले में संदर्भ के अनुसार चार मुख्य जातियां अभिप्रेत हैं।
श्री आर. के. चौधरी (असम) : मैं अनुरोध करता हूँ कि :
| ¼v | le |
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खंड 3 के भाग ( i ) के प्रावधानां का लोप किया जाएगा।