हिंदू कोड-जारी - Page 460

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उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तुत संशोधन इस प्रकार है :

खंड 3 के भाग ( i ) के प्रावधानों का लोप किया जाएगा।

श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : मैं भी संशोधन प्रस्तुत करना चाहता हूँ। हम दोनों ने संशोधन की सूचना संयुक्त रूप से दी है।

उपाध्यक्ष महोदय : मैं सभी सदस्यों द्वारा संशोधन प्रस्तुत किए जाने को ज्यादा महत्व नहीं देता। परन्तु माननीय सदस्य यदि कोई संशोधन वापस लेना चाहते हैं, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि दूसरे माननीय सदस्य अपनी बात कहें अथवा यदि माननीय सदस्य अनुपस्थित हैं तो दूसरे माननीय सदस्य उसे वापस ले सकेंगे।

कैप्टन ए. पी. सिंह (विंध्य प्रदेश)ः मैं भाग ( viii ) से संबंधित अपना संशोधन 378 कैप्टन ए. पी. सिंह (विंध्य प्रदेश)ः मैं भाग (

प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

उपाध्यक्ष महोदय : हम अभी उस भाग पर नहीं आए हैं।

श्री श्यामनंदन सहाय : आपने कहा था कि आप पहले एक वर्ण या समूह से संबंधित सभी संशोधनों पर कार्रवाई करेंगे। मेरा सुझाव है कि हम केवल एक बात की परिभाषा से संबंधित सभी संशोधनों पर अभी विचार-विमर्श करें और उन्हें निपटाएं और फिर हम किसी और मुद्दे से संबंधित दूसरे संशोधनों पर जाएं। अन्यथा इससे कठिनाइयां उत्पन्न होंगी।

उपाध्यक्ष महोदय : यही मैं कर रहा हूँ। अभी हम केवल भाग ( i ) - “प्रथा” और ”रूढि़“ के संशोधनों पर चर्चा कर रहे हैं।

श्री भट्ट (बम्बई) : मैंने एक संशोधन सभापटल पर रखा है, जो आप तक पहुंच गया होगा। यह प्रथा और रूढि़ के बारे में है।

उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है, क्या है इसमें?

श्री भट्ट : यह भाग ( i ) के बारे में है।

उपाध्यक्ष महोदय : लेकिन इसकी प्रति मेरे पास अभी नहीं है। मैं सदन को आश्चर्य में नहीं डालना चाहता। कम से कम विधेयक के प्रस्तावक को तो संशोधन की प्रति पर्याप्त समय पूर्व उपलब्ध कराई जानी चाहिए और एक प्रति मुझे भी भिजवाई जानी चाहिए। इससे ज्यादा मैं कोई अपेक्षा नहीं करता। हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

श्री भट्ट : मुझे लगा कि आपको कार्यालय से इसकी प्रति शायद मिल चुकी है जैसी कि मुझे अभी आधे घंटे पहले मिली है।