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मृत व्यक्ति का छोटा भाई उस विधवा से विवाह कर सकता है, चाहे उसकी पत्नी जीवित हो; और उसकी सम्पत्ति परिवार में ही रहती है और वह स्त्री भी परिवार में रहती है। इसलिए सार्वजनिक नीति के विरुद्ध होने का तात्पर्य कुछ भी हो सकता है। यह शब्द इतना लचीला है कि यह कानून मंत्री के पांव की लम्बाई के अनुसार भिन्न हो सकता है, इसलिए मैं इन शब्दों का विरोधी हूँ। बल्कि मैं यह चाहूँगा कि किसी ऐसी प्रथा को मान्यता दी जानी चाहिए जो कानूनी दृष्टि से मान्य हो और समय की कसौटी पर खरी उतरी हो।
उपाध्यक्ष महोदय : एतद्पश्चात् कोई प्रथा नहीं होगी।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मेरा निवेदन यह है कि इस मामले के संबंध में जिसमें हिंदू कोड में प्रावधान किया गया है, कोई प्रथा नहीं होनी चाहिए। अन्यथा इस कोड का पूरा प्रयोजन ही विफल हो जाएगा। महोदय, आप बिल्कुल सही हैं, जब आपने यह कहा कि जिन मामलों के बारे में हिंदू कोड में प्रावधान किया जा रहा है, कोई रिवाज नहीं होना चाहिए, परन्तु जहां तक और मामलों का संबंध है, जहां तक हिंदू कोड उन मामलों से जरा भी संबंधित नहीं है........
उपाध्यक्ष महोदय : क्या होगा यदि ऐसी कोई प्रथा है जो अविवादित है? इसे न्यायालय में लाने की कोई जरूरत नहीं है। केवल विवादित प्रथा ही न्यायालय में लाई जाती है और उसे मान्यता दी जाती है अथवा नहीं दी जाती है। ऐसी कोई प्रथा जो सार्वजनिक नीति के प्रतिकूल नहीं है, समाज द्वारा स्वीकृत कर ली जाती है। महज इसलिए कि न्यायालय द्वारा इसे मान्यता नहीं दी गई है, क्या इसका आधार समाप्त हो जाता है?
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मेरा निवेदन यह है कि यदि कोड में इसके लिए उपबंध रखा गया है तो यह फलती-फूलती नहीं है यदि कोई उपबंध नहीं है तो यह यथावत रहती है और फलती-फूलती है, और यदि आप ”सार्वजनिक नीति के विरुद्ध “ शब्दों को हटा भी देते हैं तो भी यह यथावत रहेगी क्योंकि यह कानून का नियम है। यदि आप “सार्वजनिक नीति के विरुद्ध” शब्द रखते हैं, तो किसी प्रथा के अच्छे होने और समाज के अधिकांश लोगों द्वारा पालन किए जाने के बावजूद यदि कोई कहता है कि यह सार्वजनिक नीति के विरुद्ध है, वह फलती-फूलती नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य एक अच्छे वकील हैं। मेरी खुद की व्याख्या भिन्न है। जहां कहीं इस कोड में किसी विशिष्ट बात का प्रावधान किया गया है, जब तक अपवाद नहीं किया गया हो, उस सीमा तक वह प्रथा रद्द कर दी गई है, चाहे वह सार्वजनिक नीति के विरुद्ध है अथवा नहीं। क्या कठिनाई है, जिसके लिए