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पंडित ठाकुर दास भार्गव : जहां तक आपकी समुक्तियों का संबंध है, आपकी
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अनुमति से मैं कुछ कहना चाहता हूँ। इस सदन के सदस्य महसूस करते हैं कि अध्यक्ष का पद एक पवित्र पद है। विट्ठल भाई पटेल - जिनका चित्र आज हमारे सामने है- इस आसंदी पर विराजते थे और उन्होंने अध्यक्ष पद को सुशोभित किया था। उनके पश्चात इस पद पर अनेक प्रतिष्ठित, लब्धप्रतिष्ठित विभूतियां आसीन हुई थीं। हम सभी जानते हैं कि अध्यक्ष पद पर आसीन व्यक्ति ने नीर-क्षीर विवेक से कार्य किया है। बाहरी दुनिया के किसी व्यक्ति अथवा यहां के किसी सदस्य का यह समझना सर्वथा अनुचित है कि किसी प्रश्न पर बहस के दौरान अध्यक्ष ने निष्पक्ष अथवा उचित आचरण नहीं किया।
लेकिन जब भावनाएं भड़का दी जाती हैं, जब लोग पक्ष लेने लगते हैं तो उनके लिए अध्यक्ष अथवा सदन के सदस्यों के आचरण को असंतुलित नजरिए से देखा जाना लाजमी है कुछेक सदस्यों ने भारी आपत्ति की थी और एक सदस्य का भाषण बीच में ही रोकने के लिए आपसे कहा था। उस प्रत्येक सदस्य के दृष्टिकोण को मैं अच्छी तरह समझ सकता हूँ, जो लम्बा भाषण देना चाहते हैं। यहां तक कि डॉ. अम्बेडकर ने भी कुछ वक्तव्य ऐसे दिए जिन पर कुछेक सदस्यों ने आपत्तियां की थीं, हालांकि मैं भी उनमें से एक था। प्रत्येक सदस्य को आलोचना करने का अधिकार है। जहां तक हमारा सवाल है, ऐसी आलोचना से आहत होने के लिए हमारी चमड़ी अब बहुत मोटी हो चुकी है। जहां तक इस सदन में अध्यक्ष के आचरण का संबंध है, किसी भी सदस्य ने एक क्षण के लिए भी यह महसूस नहीं किया कि अध्यक्ष का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा है।
समाचार पत्रों को किसी की भी और हर किसी की आलोचना करने का अधिकार है। मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं होती, यदि कोई पत्रकार मेरी आलोचना करता है। उन्हें आलोचना करने दे - उनका अपना दृष्टिकोण है। हमें इतना आहत होने की आवश्यकता नहीं है।
जहां तक इस सदन के भीतर या बाहर के किसी व्यक्ति द्वारा अध्यक्ष पर कटाक्ष करने का प्रश्न है, मैं कड़ी आपत्ति करूंगा और यदि आप महसूस करते हैं कि क्षमा याचना सन्तोषजनक नहीं है, तो आपको संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय : जहां तक मेरा संबंध है, उन्होंने जो कुछ लिखा है, उससे मैं
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संतुष्ट हूँ। इसलिए अब इस मामले को आगे बढ़ाना जरूरी नहीं है। बहरहाल, यदि कोई माननीय सदस्य महसूस करते हैं कि इस पत्र में उन पर कटाक्ष किया गया है