हिंदू कोड-जारी - Page 473

458 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तो हम इसकी जांच कराएंगे। इस समय मैं नहीं समझता कि किसी माननीय सदस्य या सदन पर कटाक्ष किया गया है।

श्री संथानम : क्या यह कहा गया है कि आलोचना केवल सरकार की ही की जा सकती है सदस्यों की नहीं?

डॉ. देशमुख : जहां तक कार्टून का संबंध है, श्री गुप्ता ने जहां अपनी स्थिति स्पष्ट करने के इरादे से पत्र लिखा था, वहीं उन्हांने अनावश्यक रूप से आगे बढ़ते हुए सदस्यों के एक तबके पर यह आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की कि वे इस उपाय में रुकावट डाल रहे हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : यह पत्र दो भागों में है। जहां तक अध्यक्ष पद का संबंध है और सदन के विशेषाधिकार का सम्बंध है, मामला मुझ पर छोड़ दिया जाए। उन्होंने जो कुछ लिखा है, उससे मैं संतुष्ट हूँ। तथापि, माननीय सदस्य महसूस करते हैं उन पर कोई कटाक्ष किया गया है तो वे मेरे कक्ष में आकर मुझसे मिल सकते हैं और हम इस मामले पर चर्चा करेंगे।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : उस पर क्या आपत्ति की जा सकती थी? श्री देशबंधु गुप्ता ने खुद प्रेस विधेयक पर चार घंटे लिए थे; हमारे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद ने इस विधेयक पर सात घंटे लिए।

डॉ. देशमुख : यह तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाला मामला है। जो कुछ आपने अपने स्वयं के बारे में और इस सदन के कार्य के संव्यवहार के बारे में कहा है, मैं आपकी अनुमति लेकर कुछ शब्द कहना चाहता हूँ जो इस प्रकार हैं - मैं, जहां आपकी टोकाटाकी और इस सदन के कार्य के संव्यवहार में आप जो सहायता करते हैं, उसका तहे दिल से स्वागत करता हूँ, मैं ससम्मान यह उल्लेख करना चाहूँगा कि यदि बहस चलाने दी जाए तो संभवतः कम समय खर्च होगा। अध्यक्ष का मैं सबसे अधिक सम्मान करता हूँ और वे कार्यवाही में मदद करने के उद्देश्य से ही हस्तक्षेप करते हैं। परन्तु यदि इसे कम से कम रखा जाए और जब आवश्यक हो तभी मदद की जाए तो हम संभवतः बेहतर तरीके से आगे बढें़गे।

श्री भारती (मद्रास) : यह अध्यक्ष को दिया गया एक निर्देश है जो अवांछनीय है।

डॉ. देशमुख : अध्यक्ष महोदय ने हमसे हमारी राय मांगी है।

श्री भारती : अध्यक्ष महोदय को निर्देश देने के लिए नहीं।