हिंदू कोड-जारी - Page 478

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श्री झुनझुनवाला : हम देखेंगे कि विधि मंत्री उन्हें मान्यता दे देंगे।

श्री श्यामनन्दन सहाय : आप देखेंगे कि मेरे संशोधन में ”प्रथा“ एवं रूढि़“ से संबंधित उप-खंड अथवा मद में दो प्रावधानों का लोप करने का सुझाव दिया गया है। यह संशोधन प्रस्तावित करने का उद्देश्य वही है जिसका उल्लेख माननीय विधि मंत्री जी ने किया है। माननीय विधि मंत्री ने कहा है कि यहां दी गई परिभाषा लगभग संबंधित मुद्दे पर दिए गए न्यायिक निर्णय पर आधारित हैं और न्यायिक निर्णय यही हैं कि “प्रथाएं एवं रूढि़यां” शब्द उसी के द्योतक हैं जो परिभाषा में निर्धारित है। ”प्रथा एवं रूढि़“ शब्द विभिन्न न्यायिक निर्णयों की विषय-वस्तु रहे होंगे और रहते आए हैं और इसीलिए मैंने कहा कि यदि “प्रथा एवं रूढि़” शब्दों को यही कानूनी एवं न्यायिक अर्थ दिया गया है तो यहां प्रावधान करके इस परिभाषा पर और भार डालना वांछनीय नहीं होगा, क्योंकि उनका वही अर्थ होगा। इस प्रकार निवेदन करने का मेरा कारण यह है कि........

उपाध्यक्ष महोदय : मैं समझ सकता हूँ। जहां कोई परिभाषा नहीं की गई है वह न्यायिक निणर्यों को आधार बना सकते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : कोर्ट भी स्वतंत्र होगा कि........

उपाध्यक्ष महोदय : प्रथा निरन्तर और एक समान है।

श्री श्यामनंदन सहाय : जब कानून में कोई शब्द प्रयुक्त किया जाता है जो न्यायिक व्याख्या का विषय रहा हो, तो उस शब्द की जब कभी न्यायिक व्याख्या कराई जाती है तो उसकी वही व्याख्या की जाएगी, जो न्यायिक निर्णयों में दी गई हो। इसके विपरीत मैं महसूस करता हूँ कि कानून इतने क्रांतिकारी परिवर्तन कर देता है कि हिंदू कानून की जिस सामान्य तरीके से व्याख्या की जाती है उसमें भी अद्भुत बदलाव हो जाएंगे और मेरा निवेदन यह है कि परन्तुकों की मौजूदगी से न्यायपालिका भी यह महसूस कर सकती है कि व्याख्याओं और विनिर्णयों पर भी अब नए सिरे से विचार करना होगा और “प्रथा एवं रूढि़” शब्दों का प्रयोग भी उदाहरण के लिए, न केवल इस आधार पर करना पडे़गा कि यह निरंतर हो रहा है, कि नियम निश्चित है और अनुचित अथवा सार्वजनिक नीति के विरुद्ध नहीं रहा है। महोदय, आप इसमें कठिनाई आती हुई देखेंगे, क्योंकि ”सार्वजनिक नीति“ एक ऐसा मामला है जो एक निरंतर परिवर्तनशील प्रक्रिया है।

उपाध्यक्ष महोदय : इससे कोई इंकार नहीं करता है। परिस्थिति विशेष में सार्वजनिक नीति क्या है, यह ऐसा मामला है जिसका निर्णय........