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के लिए छूट नहीं है, लेकिन इस एक कानून को सभी विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी व्यक्तियों पर लागू होना चाहिए। ऐसा है तो मेरा कहना है, हमें विभिन्न धर्मों के मानने वालों के लिए कानून बनाने में क्यों, हिचकिचाना चाहिए, इसका कोई कारण नहीं है। संशोधनों को जो सामने आ चुके हैं और प्रस्तुत हो चुके हैं, मुझे लगता है इस संहिता के संचालन से सिख दूर रहना चाहते है। यह एक संशोधन जो मेरे मित्र श्री हुकमसिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया है का असर है। तब मुझे लगा कि कुछ ऐसे माननीय सदस्य भी हैं जो इच्छुक हैं कि खंड-2 इस प्रकार संशोधित हो कि वह आवश्यक रूप से सभी राज्यों और समुदायों पर लागू रहे। मेरे माननीय मित्र पंडित ठाकुरदास भार्गव, जैसा हम सभी जानते है, वे भी बड़े समाज सुधारक हैं और उनकी हमेशा इच्छा, इस सदन में ऐसे अधिनियम को जो समाज को ऊपर उठाने के लिए हो, प्रस्तुत करने की रहती है। उनके संशोधन के अनुसार वह यह चाहते हैं कि विभिन्न राज्यों को विधेयक को अपनाने या न अपनाने की खुली छूट होनी चाहिए। उनकी यह भी इच्छा है कि विभिन्न समुदायों को यह खुली छूट होनी चाहिये कि उन पर संहिता लागू हो या नहीं।
श्री त्यागी : उस स्थिति में वास्तव में क्षेत्रीय समता नहीं होगी।
श्री जे. आर. कपूर : ठीक है। सभी क्षेत्रों और समुदायों पर लागू करने के लिए मेरा संशोधन स्वीकार किया जाना चाहिए। इस संहिता को न तो एक क्षेत्र या दूसरे क्षेत्र में, न ही एक समुदाय से दूसरे समुदाय में लागू करने में कोई रुकावट होगी। दूसरी तरफ इस अधिनियम का दायरा भी बढ़ता है क्योंकि यह हिंदुओं में सभी को समेट लेता है, चाहे वे हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी या किसी और मत में विश्वास रखते हों।
इस अधिनियम की चर्चा के समय मेरे मित्र मानवीय डॉ. टेकचन्द और पंडित ठाकुर-दास भार्गव ने कुछ अच्छे सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा था कि हिंदू समुदाय के विभिन्न वर्गों में इस अधिनियम को लागू करने से बहुत-सी परेशानियाँ होगी जिसमें विवाह और विवाह विच्छेद नियम बहुत सहज हैं। पंजाब के कुछ हिस्सों में और कुछ और जगहों पर, यह बताया गया था कि विवाह सहज ही हो सकते हैं। वे इस आसान तरीके से शादी से क्यों वंचित हों?
डॉ. देश मुख (मध्य प्रदेश) : आसान विवाह, आसान विवाह विच्छेद!
श्री जे. आर. कपूर : देश के बहुत से हिस्सों में बहुत से वर्गों के व्यक्तियों में तलाक के बारे में बहुत सहज कानून हैं। उन कानूनों को कठिन बनाया जाए? दूसरी तरफ कुछ लोगों की युक्ति थी कि विवाह और विच्छेद कानून इस संहिता के