खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

द्वारा अधिक से अधिक कठोर बना दिए गए और दूसरी तरफ, दूसरों का तर्क है उन लोगों पर विवाह और तलाक के ये नियम क्यों लागू किए जाएं जो उन पर विश्वास नहीं करते। इसलिए मेरा प्रस्ताव यह है कि यह संहिता जिस रूप में भी पारित हो हिंदू समुदाय के किसी न किसी एक विशेष वर्ग, या सिख या जैन पर ही लागू नहीं होनी चाहिए। वे इसके अन्तर्गत आएंगे या नहीं। यह खुला छोड़ दिया जाना चाहिए। दूसरे, इस संहिता के कुछ परन्तुक-विशेष रूप से वो जो एक विवाह और विवाह विच्छेद से सम्बन्धित है, मैं उनसे पूरी तरह सहमत हूँ, और चाहता हूँ उन्हें थोड़ा उदार बनाया जाना चाहिए ये इतने अच्छे हैं कि मुझे कोई कारण नजर नहीं आता। मुसलमान उसके लाभ के क्यों अधिकारी न हां।

मेरे माननीय मित्र श्री सरवटे और श्री इन्द्र ने अपने संशोधन प्रस्तुत किए हैं। विशेष रूप से श्री इन्द्र चाहते हैं कि पूरी संहिता मुसलमानों पर अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए। मैं कहीं अपने संशोधन में चाहता हूँ कि यह मुसलमानों पर ऐसे ही लागू होनी चाहिए। मैं नहीं चाहता कि इस संहिता का लागू होना प्रत्येक हिंदू पर अनिवार्य हो। मैं चाहता हूँ यह हिंदू, मुसलमान, पारसी या इस सम्बन्ध में किसी व्यक्ति किसी भी दूसरे धर्म अब या बाद में खुला होना चाहिए वास्तव में यह प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए होना चाहिए कि इस संहिता में शासित हो या नहीं।

डॉ. अम्बेडकर : बहुत उदार हैं!

श्री जे. आर. कपूर : यही नहीं, मैं चाहता हूँ यह प्रत्येक के लिए खुला हो कि यह संहिता के विभिन्न हिस्सों को छोड़ सके और ले सके। इस कारण मैं यह वक्तव्य बहुत गम्भीरता से दे रहा हूँ। एक अधिनियम में बहुत से ऐसे खंड हैं जो कुछ को एकदम मान्य होने चाहिए लेकिन दूसरों को नहीं, इस प्रकार खंड दूसरों को मान्य हो सकते हैं पर सबको नहीं।

पंडित ठाकुरदास भार्गव : क्या मेरे माननीय मित्र इससे संतुष्ट होंगे कि प्रति व्यक्ति खंड चुनाव करना चाहिए?

श्री जे. आर. कपूर : प्रति खंड नहीं परन्तु संहिता के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों से। जब मैंने यह सुझाव दिया मैं जानता था कि इसके लिए विधि विशेषज्ञ श्री अम्बेडकर, पंडित भार्गव की भी और अन्य विधि ज्ञाताओं की विधि प्रज्ञा का उपयोग मिलना चाहिए जो इस संहिता की विभिन्न धाराओं जो मेरे संशोधन के अनुरूप हो सके, बनाने के लिए आवश्यक होगी। मैं आश्वस्त हूँ कि यह कार्य डॉ. अम्बेडकर या पंडित भार्गव या दूसरे विधि प्रभावों की सामर्थ्य से बाहर नहीं है। मैं अपने आप कह रहा हूँ, मैं विशेष रूप से एक विवाह और विवाह अनुच्छेद से सम्बन्धित खंड के पक्ष