हिंदू कोड-जारी - Page 482

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श्री जे. आर. कपूर : ........उस प्रथा को वैध और मान्यता प्राप्त प्रथा का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए जो केवल एक परिवार विशेष में चल रही है।

डॉ. देशमुख : हिंदू कानून में ऐसा पहले ही कहा गया है।

श्री जे. आर. कपूर : हमारे उप खंड के शब्द इस प्रकार हैं :

”एक नियम दर्शाता है, जिसका पालन लम्बे समय तक निरंतर और एक समान तरीके से किए जाने के कारण इसने किसी स्थानीय क्षेत्र, जनजाति, सम्प्रदाय, समूह अथवा परिवार के हिंदू लोगों में कानून का रूप ले लिया है।“

उपाध्यक्ष महोदय : सदन इस अभिव्यक्ति से अवगत है। माननीय सदस्य ने अनेक संशोधन प्रस्तावित किए हैं, उन्हें किसी भी समय यह महसूस नहीं हुआ कि ये शब्द हटा दिए जाने चाहिए। मैं नहीं चाहता कि इस मामले पर अब और समय

खर्च किया जाए।

श्री जे. आर. कपूर : मैं कोई संशोधन प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ। मैं इस खंड के इस विशेष भाग का विरोध कर रहा हूँ। मुझे नहीं लगता कि मुझे यह सुझाव देने का आगे कोई मौका मिलेगा। जहां तक मेरा कोई संशोधन प्रस्तुत न करने का संबंध है, मैं स्वीकार करना चाहता हूँ कि मैं यह देखकर बहुत निराश हूँ कि मेरे कोई भी संशोधन माननीय विधि मंत्री जी को स्वीकार्य नहीं है, इसलिए मैंने सोचा कि औपचारिक रूप से कोई संशोधन प्रस्तुत करने के बजाए मैं किसी बात पर अनौपचारिक रूप से कोई सुझाव उन्हें दूँ ताकि वे स्वयं ही कोई संशोधन प्रस्तावित कर दें। तब वह आसानी से इस सदन को स्वीकार्य होगा बहरहाल, अब मुझे इस मुद्दे पर और कोई निवेदन नहीं करना है।

श्री शिवचरणलाल (उत्तर प्रदेश) : मेरा विचार है कि सभी संशोधन अस्वीकार

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किए जाने चाहिए और यह खंड जिस रूप में है उसे स्वीकार कर लिया जाना चाहिए। मुझे यह देखकर हैरानी है कि पंडित ठाकुर दास भार्गव एक वकील होकर भी यह कहते हैं कि “सार्वजनिक नीति के विरुद्ध” शब्दों को हटा दिया जाना चाहिए। यह अत्यंत आवश्यक बात है। जैसे-जैसे समाज प्रगति करता है, समाज की राय अधिकाधिक महत्व रखने लगती है। उस राय के खिलाफ कोई भी बात स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए, चाहे वह एक पुरानी प्रथा रही हो। पंडित ठाकुर दास भार्गव यह भी चाहते हैं कि “एक समान रूप से“ शब्द हटा दिए जाने चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि “एकसमान रूप से” का अभिप्राय उनके अनुसार सभी लोगों के लिए एक समान रूप से है। ऐसा नहीं है। यह एक परिवार की प्रथा हो सकती है ”एक समान रूप से“ से तात्पर्य है कि इसका पालन लगातार और एक समानरूप से हो रहा है और यह बदली नहीं है। इसलिए ‘‘एक समान रूप से“ शब्द भी जरूरी हैं।