हिंदू कोड-जारी - Page 491

476 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

भाग ( i ), जिसे बदलकर इसे खंड का भाग ( ii ) किया गया है के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :

”( ii ) ”प्रथा“ और “रूढि़“ अभिव्यक्तियां एक नियम दर्शाती हैं, जिसने लम्बे समय तक प्रचालन में रहने के कारण किसी स्थानीय क्षेत्र, जाति, उपजाति, जनजाति, सम्प्रदाय, समूह अथवा परिवार के हिंदुओं में कानून का बल प्राप्त कर लिया है :

बशर्ते कि नियम निश्चित हो और अनुचित न हो; और

बशर्ते यह भी कि किसी एक परिवार पर लागू नियम के मामले में उस परिवार द्वारा उस नियम का पालन बन्द न किया गया हो“

प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

“कि भाग ( i ), जिसे बदल कर खंड 3 का भाग ( ii ) कर दिया गया है इस विधेयक का भाग है”

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं भाग ( ii ) में संशोधन सं. 377 प्रस्तावित करना

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चाहता हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : मैं भी यहां सुझाव देने के लिए उत्सुक हूँ क्योंकि इससे हमारी मशक्कत कम हो जाएगी। जैसा कि आप देखेंगे कि भाग ( ii ) में दी गई कुछ परिभाषाएँ न केवल विवाह और विवाह-विच्छेद पर लागू होती हैं, बल्कि उन्हें इस कोड के अन्य भागों पर भी लागू किया जाना था। जो कुछ विचार-विमर्श हुआ है, उसे देखते हुए बाद में मेरे लिए इस परिभाषा में संशोधन करना और इसे विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित प्रावधानों तक सीमित रखना जरूरी हो जाएगा। इसलिए मैं इस सदन को, इसे अत्यधिक महत्व दिए बिना इसे औपचारिक तरीके से पारित कर देने का सुझाव देना चाहता हूँ क्योंकि मैं इस पर फिर आऊँगा जब मैं परवर्ती संशोधनों पर बात करूंगा और तब यदि आप चाहें तो इस पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जाएगी। इस समय मैं इस परिभाषा पर विशेष ध्यान नहीं देना चाहता, क्योंकि मैं जानता हूँ कि मुझे इसमें संशोधन करना है।

उपाध्यक्ष महोदय : क्या इसे केवल इसी भाग में रखे जाने पर कोई आपत्ति है?