हिंदू कोड-जारी - Page 492

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डॉ. अम्बेडकर : मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

उपाध्यक्ष महोदय : जो कुछ विचार-विमर्श हुआ है उसे देखते हुए कुछ परिणामी संशोधन बाद में दिए जाने हैं। इसलिए मैं इस भाग को यहां यथावत रखने की अनुमति देता हूँ।

श्री संथानम : इसका आशय है कि पूरा खंड रखा जाएगा। लेकिन भाग ( viii ) और ( ix ) को पारित करने के बाद पूरा खंड रखा जाना है।

उपाध्यक्ष महोदय : यह विवेकाधिकार अध्यक्ष का है कि पूरा खंड रखा जाए या एक भाग के बाद दूसरा भाग रखा जाए। दरअसल मैंने एक भाग के बाद दूसरा भाग, इस प्रकार इसे रखा था, जिसमें से दो भाग हम स्वीकार कर चुके हैं।

श्री भारती : परिभाषाएं किसी भी समय जोड़ी जा सकती हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : यदि इस विधेयक का दायरा सीमित रखा जाना है तो ऐसा करने में नुकसान ही क्या है?

श्री नजीरुद्दीन अहमद : महोदय, मेरा संशोधन इस ही प्रयोजन के लिए है।

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य ने पहले ही विचार कर लिया है और माननीय मंत्री जी भी वही स्वीकार कर रहे हैं जो माननीय सदस्य ने कहा है। इसलिए यह मामला यथावत रहेगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

श्री भारती : कोड के जिस भाग को हम पारित करना चाहते हैं उसमें ”पूर्ण रक्त“ और “अर्द्ध रक्त“ शब्द नहीं आते हैं। हम मूलतः पूरा कोड पारित करना चाहते थे और ये शब्द जरूरी नहीं थे। अब, जब ये शब्द इस भाग में नहीं आते हैं तो हम इन्हें भी हटा सकते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : ये शब्द निषिद्ध संबंधों, सपिण्ड संबंधों आदि के संबंध में आ सकते हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि इस भाग को इसी समय पारित करना वांछित होगा और बाद में यदि मुझे इसमें संशोधन करना जरूरी लगता है तो मैं संशोधन कर लूँगा।

श्री भारती : आखिरकार ये उन शब्दों की परिभाषाएं हैं जिनका संबंध परवर्ती अध्यायों में आने वाले शब्दों से होना चाहिए। यदि विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित अध्यायों में हमें ये शब्द दिखाई नहीं देते तो मेरे विचार से परिभाषा रखने का कोई लाभ नहीं है।