हिंदू कोड-जारी - Page 493

478 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमद : इस भाग को संशोधन सं. 360 द्वारा संशोधित किया

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गया है, जो इस भाग का नवीनतम पाठ है। लेकिन उसमें भी “गर्भस्थ रक्त” जैसे शब्द आते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : मेरा सुझाव है कि इन परिभाषाओं को यहां रखना ही बेहतर होगा; यदि बाद में हमें बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो हम इसे बदल देंगे, क्योंकि मैंने पहले ही बताया है कि इस कोड के बारे में जो विचार-विमर्श हुआ है, उसे देखते हुए समुचित संशोधन प्रस्तुत करने का मेरा अधिकार सुरक्षित है।

उपाध्यक्ष महोदय : कुछ भी हो, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि विवाह और विवाह-विच्छेद संबंधी अध्यायों के लिए भी यह जरूरी है। और ये शब्द मूल भाग और संशोधित भाग, दोनों में आते हैं।

अब मैं भाग ( iii ) को मतदान के लिए प्रस्तुत करता हूँ।

प्रश्न इस प्रकार है :

”कि भाग ( iii ) जिसे बदलकर खंड 3 का भाग ( iv ) किया गया है, इस विधेयक का भाग है।“

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

मद ( iv ), जिसे बदलकर ( v ) किया गया है, के स्पष्टीकरण में ”इस खंड“ के स्थान पर “( iv ) और ( v )” शब्द रखे जाएंगे”।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

”कि यथा संशोधित भाग ( iv ), जिसे बदलकर भाग ( v ) किया गया है, इस विधेयक का भाग रहेगा।”

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

खंड 3 में भाग ( iv ), जिसे बदलकर भाग ( v ) किया गया है में निम्नलिखित नया भाग जोड़ा जाएगा :

”( iv ) ’मरूमक्कट्टयम कानून’ से उन व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रणाली अभिप्रेत है -