हिंदू कोड-जारी - Page 494

479

(क) जो मद्रास मरूमक्कट्टयम अधिनियम, 1932 (1933 का मद्रास अधिनियम XXII ), ट्रावनकोर नायर अधिनियम, 1100 का II, ट्रावनकोर एझावा अधिनियम, 1100 का III, नंजीनदाद वेल्लाला अधिनियम, 1101, ट्रावनकोर क्षेत्रिय अधिनियम, 1108, ट्रावनकोर कृष्णवक : मरूमक्कथय्यी अधिनियम, 1115, कोचीन थिय्या अधिनियम, 1107 का VIII, 1113 का कोचीन नायर अधिनियम अथवा कोचीन मरूमक्कथयम अधिनियम 1113 का XXXIII द्वारा नियंत्रित होते; यदि यह कोड पारित नहीं होता; अथवा

(ख) जो ऐसे किसी समुदाय से संबंधित हैं जिनके सदस्य अधिकांशतः ट्रावनकोर-कोचीन या मद्रास राज्य में निवास करते हैं, और यदि यह कोड पारित नहीं होता तो वे किसी ऐसी उत्तराधिकारी प्रणाली से शासित होते जिसमें वंश का निर्धारण स्त्री वंश से होता है; परन्तु इसमें आलियासंतान कानून शामिल नहीं है;”

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह पुनर्विचार के अध्यधीन है।

ge n

उपाध्यक्ष महोदय : जी नहीं हम आलियासंतान कानून पारित कर चुके हैं।

डॉ. अम्बेडकर : इसकी विषय-वस्तु पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

उपाध्यक्ष महोदय : जहां तक भाषा का संबंध है, कोई उपांतरण सुझाने के लिए माननीय सदस्य सदैव स्वतंत्र हैं।

प्रश्न इस प्रकार है :

खंड 3 में ”मरूमक्कट्टयम कानून“ की परिभाषा के बाद निम्नलिखित नया भाग जोड़ा जाएगाः

”( vii )“ ’नम्बूद्री कानून’ से उन व्यक्तियों पर लागू कानून अभिप्रेत है, जो मद्रास नम्बूद्री अधिनियम 1932 (1933 का मद्रास अधिनियम XXI ), कोचीन नम्बूद्री अधिनियम (1114 का XVII ), अथवा 1106 के ट्रावनकोर मलयाला ब्राह्मण अधिनियम (1106 का विनियमन III ) द्वारा नियंत्रित होते, यदि यह कोड पारित नहीं हुआ होता;“

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : अब हम भाग ( viii ) - अर्थात् मूल भाग ( v ) पर आते है। इसमें कहा गया है कि “भाग“ से इस कोड का कोई भी भाग अभिप्रेत है’’ - क्या इसमें सुधार करना चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : इस समय मेरे लिए यह बता पाना बहुत कठिन है कि मैं कहां