हिंदू कोड-जारी - Page 498

483

उपाध्यक्ष महोदय : क्या इसके साथ कोई रस्म भी जुड़ी है?

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यह कई तरीकों से किया जाता है। यह सब सार्वजनिक रूप से किया जाना जरूरी है; इसलिए कुछेक मामलों में इसका पंजीयन भी कराया जाता है। पूरा परिवार एकत्र होता है और लड़के को उत्तराधिकारी स्वीकार किया जाता है। कुछ स्थानों पर रस्म भी निभाई जाती है। व्यावहारिक तौर पर इसे दत्तक ग्रहण माना जा सकता है।

उपाध्यक्ष महोदय : जिन इलाकों में यह प्रथा प्रचलित है क्या वहां पर नियमित दत्तक ग्रहण भी किया जाता है? अथवा क्या यह माना जाए कि जहां कहीं ”उत्तराधिकारी को नियुक्त करने“ की यह प्रथा प्रचलित है, वहां नियमित दत्तक ग्रहण नहीं किया जाता है?

पंडित ठाकुर दास भार्गव : दरअसल, ऐसा उसके अलावा किया जाता है।

उपाध्यक्ष महोदय : क्या किसी व्यक्ति का दत्तक पुत्र और नियुक्ति उत्तराधिकारी, दोनों हो सकते हैं?

पंडित ठाकुर दास भार्गव : एक ही परिवार में एक भाई का दत्तक पुत्र और दूसरे भाई का नियुक्त उत्तराधिकारी भी हो सकता है। परन्तु जहां तक संबंध का प्रश्न है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुसलमानों में भी यह प्रथा प्रचलित है।

ख्वाजा इनायत उल्ला (बिहार) : मुस्लिम कानून में दत्तक ग्रहण का प्रावधान नहीं है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैं मुस्लिम कानून की बात नहीं कर रहा हूँ; मैं मुस्लिम प्रथा के बारे में बता रहा हूँ। लगभग हर पंजाबी मुसलमान इस प्रथा को मानता है।

उपाध्यक्ष महोदय : परन्तु जब यह इतनी प्रचलित है तो इसे इस परिभाषा के अन्तर्गत लाया जा सकता है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : इस प्रथा की वैधता पर कोई संदेह नहीं कर सकता है। आप पारम्परिक कानून का कोई भी ग्रंथ देख लें, तो आप पाएंगे कि उत्तराधिकारी की नियुक्ति एक पारम्परिक पद्धति है।

श्री राधेलाल व्यास : क्या किसी स्त्री को उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाता है?