हिंदू कोड-जारी - Page 505

490 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि-

ut h#n~n
g en

“4. इस अधिनियम के प्रवृŸा होने से तत्काल पहले प्रभावी हिंदू कानून के सभी पाठ, नियम, व्याख्याएं अथवा सभी प्रथाएं तथा रूढि़यां एवं अन्य सभी कानून, जो इस अधिनियम से असंगत है, असंगति की सीमा तक प्रभावहीन होंगी।“

महोदय मेरा एक और संशोधन है।

उपाध्यक्ष महोदय : क्या यह आवश्यक है?

mi kè;{

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह अधिक व्यापक है। मैं प्रस्ताव करता हूँ कि :

ut h#n~n
g en

खंड 4 के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :

“4. पवित्र पुस्तकों में अथवा भारत में उच्च न्यायालयों के न्यायिक निर्णयों में अथवा प्रिवी कौंसिल की न्यायिक समितियों के निर्णयों अथवा विद्वान लेखकों एवं मनीषियों की पाठ्य पुस्तकों एवं टीकाओं में हिंदू कानून के सभी नियमों की व्याख्या से संबंधित सभी पाठ एवं इस कोड के प्रवृŸा होने से तत्काल पहले प्रभावी सभी प्रथाएं एवं रूढि़यां, जो इस कोड से असंगत हैं, असंगति की सीमा तक प्रभावहीन होंगी।“

उपाध्यक्ष महोदय : यह तो दूसरे रूप में है।

mi kè;{

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह और भी विस्तृत रूप में है, जिसमें और अधिक

ut h#n~n
g en

विषय शामिल हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : इसकी विषय-वस्तु भिन्न है।

mi kè;{

श्री नजीरुद्दीन अहमद : हालांकि यह मामूली तौर पर है।

ut h#n~n
g en

उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तुत संशोधन इस प्रकार है :

mi kè;{

“4. इस कोड के प्रवृŸा होने से तत्काल पहले प्रभावी कोई भी प्रथा अथवा रूढि़ हिंदू कानून के सभी पाठों, नियम अथवा व्याख्या पर अथवा किसी दूसरे कानून के प्रावधान पर बाध्यकारी एवं अभिभावी होगी और विवाह तथा विवाह-विच्छेद से संबंधित सभी मामलों में पूर्वोदाहरण होगी।“ यह धारा 4 के विपरीत है और मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर ’प्रथा’ को जो स्थान देना चाहते हैं, जिसमें मैं व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं हूँ, उसकी केवल विडम्बना दर्शाने के लिए है।“

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि-

ut h#n~n
g en

खंड 4 के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :