हिंदू कोड-जारी - Page 507

492 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य चाहते हैं कि विशिष्ट संस्कृति को न्यायालय में सिद्ध किया जाना है।

श्री झुनझुनवाला : यह तो संविधान में ही दिया गया है।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रथा की जैसी परिभाषा यहां दी गई है वैसी संस्कृति की परिभाषा नहीं दी गई है मुझे नहीं मालूम कि क्या विशिष्ट संस्कृति की अब तक कोई न्यायिक व्याख्या की गई है।

श्री झुनझुनवाला : यह तो संविधान में पहले से ही है।

श्री संथानम : यह नीति निर्देशक तत्वों में होना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर : यह नीति निर्देशक तत्वों में कहीं होना चाहिए या धर्म इत्यादि से संबंधित प्रावधानों में हो सकता है।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तावित संशोधन इस प्रकार हैं :

खंड 4 में निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाए :

“बशर्ते कि यह जिसे हिंदू धर्म अथवा किसी अन्य धर्म की स्वीकृति प्राप्त है, जिस धर्म अथवा धर्मों के अनुयायियों पर यह कोड लागू होगा :

बशर्ते यह भी कि यह कोड इस कोड के प्रवृŸा होने से तत्काल पहले प्रभावी हिंदू कानून के किसी पाठ, नियम अथवा व्याख्या अथवा किसी प्रथा अथवा रूढि़ अथवा किसी अन्य कानून पर अभिभावी नहीं होगा, जिसे नैतिकता की स्वीकृति प्राप्त है।“

डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, निम्नलिखित परंतुक को प्रस्तावित

खंड 4 में जोड़ा जाएगा :

“बशर्ते यह कि यह कोड ऐसी मौजूदा रूढि़यों, प्रथा तथा कानून पर अभिभावी नहीं होगा, जो लोगों के किसी वर्ग, जिन पर यह कोड लागू है, की विशिष्ट संस्कृति का भाग है।“

श्री सरवटे (मध्य भारत) : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि : खंड 4 में निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाए :

बशर्ते यह कि राज्य का विधानमण्डल अपने अथवा उसके कुल सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित विधान द्वारा उपबंधित कर सकता है कि इस अधिनियम का कोई प्रावधान उस राज्य पर लागू नहीं होगा अथवा ऐसे उपांतरण के साथ उस राज्य पर लागू होगा, जिसे विधान में शामिल किया गया है।“