496 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
“जब तक इस कोड में स्पष्ट रूप से अन्यथा उपबंधित न हो, कोड में उल्लिखित किसी भी मामले के संबंध में इस कोड के प्रवृŸा होने से तत्काल पहले प्रभावी हिंदू कानून के किसी पाठ, नियम अथवा व्याख्या अथवा किसी प्रथा या रूढि़ का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।“
यह कानून और प्रथा के बारे में एक परिपूर्ण बात थी।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मूल विधेयक में खंड 4 जिस रूप में है, उसमें विसंगति का कोई संदर्भ नहीं है। वह परिपूर्ण है। मेरे संशोधन में इस खंड को दो तरीकों से संशोधित करने का प्रयास किया गया है : सबसे पहले तो “जब तक स्पष्ट रूप से उपबंधित न हो आदि....“ शब्द नहीं हैं दूसरे, मूल खंड में विसंगति का प्रश्न है ही नहीं। फिर सभी प्रथाएं और हिंदू कानून के सभी पाठ जारी रहेंगे परन्तु केवल विसंगति की सीमा तक वे प्रभावी नहीं रहेंगे। अन्यथा इस अघिनियम में जो कुछ भी उपबंधित है वह प्रभावी रहेगा। महोदय, अब मैं आपकी अनुमति से संशोधन सं. 420 को इसकी शुद्धि सहित प्रस्तुत करता हूँ। मैं प्रस्ताव करता हूँ कि :
खंड 4 के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :
“4. इस कोड में उल्लिखित मामलों के संबंध में कोड की शुरुआत से तत्काल पहले प्रभावी हिंदू कानून के किसी पाठ, नियम अथवा व्याख्या और किसी कानून, प्रथा अथवा रूढि़ का प्रभाव, जहां तक वह असंगत है, समाप्त हो जाएगा।“
उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तावित संशोधन इस प्रकार है :
“4. इस कोड में उल्लिखित मामलों के संबंध में कोड की शुरुआत से तत्काल पहले प्रभावी हिंदू कानून के किसी पाठ, नियम अथवा व्याख्या और किसी कानून, प्रथा अथवा रूढि़ का प्रभाव, जहां तक वह असंगत है, समाप्त हो जाएगा।“
श्री श्यामनंदन सहाय : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि :
डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में प्रस्तावित खंड 4 के भाग (क) में “यह कोड“ शब्दों के बाद जहां यह दूसरी बार आता है “जहां तक यह इस कोड में निहित किसी भी प्रावधान से असंगत है“ शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।
उपाध्यक्ष महोदय : क्या भाग (क) में? श्री श्यामनंदन सहाय : जी हां।
उपाध्यक्ष महोदय : कानून मंत्री जी का उद्देय यह प्रतीत होता है कि एक बार किसी विशेष बात का उल्लेख यहां किया गया है तो आप किसी और कोड