हिंदू कोड-जारी - Page 516

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“रिवाज-ए-आम“ एक सार्वजनिक रिकार्ड है जिसे लोक अधिकारी द्वारा सरकारी नियमों के अन्तर्गत अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन के तौर पर तैयार किया जाता है। उसमें दिया गया विवरण स्वीकार्य होता है, चाहे प्रमाणस्वरूप कोई उदाहरण प्रस्तुत नहीं किया गया हो। रिवाज-ए-आम के अनुसरण में प्राधिकारी द्वारा प्रत्येक जिले के लिए पारम्परिक कानून से संबंधित मैनुअल जारी किए गए हैं“।

इसलिए ये प्रथाएं केवल मौखिक परम्परा से नहीं चलती कि उनके बारे में कोई विवाद हो; वे सार्वजनिक दस्तावेजों में निहित हैं। प्रत्येक विवाद निपटान में उनमें संशोधन किया जाता है और यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की जाती है कि प्रचलित प्रथा के अनुसार सब कुछ सही है। इसके बारे में कोई खतरा नहीं है। मुझे डर इस बात का है कि हम एक बहुत ही सरल कानून द्वारा काफी समय से शासित होते रहे हैं। हमें बताया जाता है कि अब इस बात के लिए बहुत देर हो चुकी है कि पंजाबी लोग उठ खड़े हों और कहें कि वे हिंदू कानून द्वारा नियंत्रित नहीं हैं। निःसंदेह वह हमारा दावा है। पंजाब कानून अधिनियम खंड 5 में बताया गया है कि हम हिंदू कानून के बजाए पारम्परिक कानून से नियंत्रित हुए हैं। हर कोई पारम्परिक कानून जानता है और इसकी अच्छी समझ रखता है।

डॉ. अम्बेडकर : यह पारम्परिक कानून से कहीं ज्यादा सरल है।

सरदार हुकम सिंह : एक ओर तो हमसे कहा जाता है कि हम काफी समय से हिंदू कानून द्वारा नियंत्रित रहते आए हैं- यह ठीक है और अच्छी बात है- परन्तु दूसरी ओर हमें यह भी कहा जाता है कि वह उचित हिंदू कानून नहीं था। हिंदू कानून अब फिर खोज लिया गया है और एक कोड तैयार किया जा रहा है और हमारे ऊपर थोपा जा रहा है। इस बात की गारंटी कहां है कि कुछेक वर्षों बाद ऐसी ही खोज फिर नहीं की जाएगी और हमारे सामने यह बयान नहीं आएगा कि तब बनाया जा रहा कानून सही है और उससे पहले सबने जो माना वह उनकी भूल थी। यदि यही प्रगतिशीलता है तो हमारा दावा है कि हमारी प्रथाएँ उस कानून से कहीं अधिक प्रगतिशील हैं जिसे अब प्रस्तावित किया जा रहा हैं। यदि प्रगति को ही मापदण्ड बनाया जाना है तो मैं तो कहता हूँ कि हमें छुओ ही मत। यदि आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो हम तो आपसे पहले ही आगे हैं। हमारे पीछे आइये। यहां तक कि विवाह और विवाह-विच्छेद के संबंध में भी हम आपसे कहीं आगे हैं। हमें पीछे मत खींचिए। कानून में वह स्तर दिखाई देना चाहिए, जहां तक समाज आगे बढ़ा है और यह कानून देने वाला यदि यह सोचता है कि इस स्तर तक आगे बढ़कर हम अब आए हैं तो वह भूल कर रहा है। यदि यहाँ केवल एकरूपता बनाने का भी सवाल है तो भी, मैं माफी चाहूँगा, वह सफल नहीं होगा। प्रथाओं और रूढि़यों