502 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के अंतर को, संस्कृतियों और भाषाओं के अंतर को इतने कम समय में आपस में मिलाया नहीं जा सकता है।
सिखों से कल एक अपील की गई थी कि वे पुराने दिनों को भूल जाएं और राष्ट्र का हिस्सा बनने की कोशिश करें। यह एक ऐसी बात है जिसे हम हमेशा संजोकर रखेंगे। हम इसके विरोधी नहीं हैं, परन्तु यदि डॉ. अम्बेडकर मुझे सुन रहे हां तो....
सरदार बी. एस. मान (पंजाब) : वे किसी से बात कर रहे हैं, उन्हें हमारे साथ बातचीत करने की परवाह नहीं है। हमारी राय की उन्हें कोई परवाह नहीं है।
सरदार हुकम सिंह : अब मैं देख रहा हूँ कि वे मुझसे मुखातिब हैं।
कल हमें याद दिलाया गया था और हमसे कल राष्ट्र का हिस्सा बनने की अपील की गई थी, कि हमें अलग रहने की प्रवृत्ति नहीं रखनी चाहिए। बहुत अच्छी बात उन्होंने कही और मैं तहेदिल से उनका शुक्रिया अदा करता हूँ। हम आगे बढ़कर उन्हें बीच रास्ते में मिलने के लिए तैयार हैं लेकिन मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूँ, जैसा कि मैंने कल भी याद दिलाया था कि उन्हें इसकी शुरुआत सरकार और मंत्रिमंडल से ही करनी चाहिए; उन्हें राष्ट्रपति को सलाह देनी चाहिए कि वे आदेश जारी करते समय भेदभाव न करें और मैंने विशेष रूप से 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का उल्लेख किया था।
डॉ. अम्बेडकर : मेरा विचार है कि मेरे माननीय मित्र सरकार की आलोचना कर सकते हैं लेकिन मेरा ख्याल है कि उन्हें राष्ट्रपति को बीच में नहीं लाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति जो कुछ करते हैं उसे वे मंत्रालय की सलाह पर करते हैं और वे मेरी जो भी आलोचना करना चाहें, वह सब मैं सहन करने के लिए तैयार हूँ।
अध्यक्ष महोदय : मेरे ख्याल से यह बात पहले भी स्पष्ट की जा चुकी है जब उपाध्यक्ष महोदय ने सदन से कहा था कि सदन में राष्ट्रपति के अभिमत का उल्लेख या आलोचना नहीं की जानी है।
सरदार हुकम सिंह : शायद मेरी बात सुनी नहीं गई है। मैंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर को राष्ट्रपति को “सलाह“ देनी चाहिए। मेरा ख्याल है कि मुझे ऐसा कहने का पूरा अधिकार है। मैं राष्ट्रपति की कार्रवाई की आलोचना नहीं कर रहा हूँ। मैं तो डॉ. अम्बेडकर से केवल राष्ट्रपति को सलाह देने का अनुरोध कर रहा हूँ।
सरदार बी. एस. मान : व्यवस्था का एक प्रश्न है, महोदया, मेरे मन में एक संदेह है। चूँकि राष्ट्रपति सरकार की सलाह पर कार्य करते हैं, तो फर्ज कीजिए कि राष्ट्रपति का कोई कार्य ऐसा है, जिससे सदन को कोई शिकायत हो, खासतौर