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से इस समय जब पंजाब राष्ट्रपति शासन के अधीन है तो क्या मुझे राष्ट्रपति के कतिपय आदेशों, जो मेरे विचार से अन्याया पूर्ण की उपयुक्तता या वैधता पर प्रश्न उठाने की कोई स्वतंत्रता नहीं है? ऐसे मामले में तो मेरे लिए राष्ट्रपति के कार्यों पर कोई सवाल करना संभव ही नहीं होगा।
डॉ. अम्बेडकर : मैं इस बारे में बिल्कुल निश्चित हूँ। यदि मेरे माननीय मित्र के सामने राष्ट्रपति द्वारा जारी किसी आदेश की आलोचना करने का अवसर आता भी है तो वह राष्ट्रपति की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र नहीं है; यदि वह चाहें तो वह सरकार की आलोचना कर सकते हैं।
सरदार बी. एस. मान : क्या तब भी जब आदेश सीधे राष्ट्रपति द्वारा जारी किए जाते हों? निःसंदेह संवैधानिक अवधारणा तो यही है कि ये आदेश मंत्रिमंडल की सलाह पर जारी किए जाते हैं। पंजाब में स्थिति यह है कि यह सीधे राष्ट्रपति के शासन के अधिन है। निःसंदेह उनके द्वारा जारी किसी भी आदेश का जिम्मेदारी मंत्रिमंडल पर होगी, परन्तु जब राष्ट्रपति के आदेशों पर चर्चा की जानी है तो राष्ट्रपति के आदेश को छोड़कर मैं उनका उल्लेख और कैसे कर सकता हूँ?
अध्यक्ष महोदय : संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राष्ट्रपति जो कुछ करते हैं उसे वे मंत्रिमंडल की सलाह पर ही करेंगे और इसी से राष्ट्रपति का प्रत्येक कार्य स्पष्ट हो जाता है।
सरदार बी. एस. मान : फर्ज कीजिए कि मैं पंजाब के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेशों का उल्लेख करना चाहता हूँ; हालांकि अवधारणा तो यही है कि राष्ट्रपति द्वारा उन्हें मंत्रिमंडल की सलाह पर ही जारी किया जाता है। इस मुद्दे पर मैं आपसे कोई स्पष्ट विनिर्णय चाहूँगा।
अध्यक्ष महोदय : मेरा ख्याल है कि यह बात डॉ. अम्बेडकर ने पहले ही स्पष्ट कर दी है और जो स्पष्टीकरण उन्होंने दिया है वह सभी श्रेणियों के आदेशों पर लागू होता है, जिनका उल्लेख अभी माननीय सदस्य ने किया है।
दो स्थितियां है : एक तो यह कि राष्ट्रपति की आलोचना नहीं की जानी है और दूसरी यह कि राष्ट्रपति जो कुछ भी करते हैं, उसे वे मंत्रिमंडल की सलाह पर करते हैं। यदि इन बातों पर विचार किया जाए तो निष्कर्ष यही निकलेगा कि उनकी कार्यवाही मंत्रिमंडल की सलाह पर आधारित होती है; फिर भी उसकी आलोचना नहीं की जानी है।
सरदार बी. एस. मान : क्या तब भी जब वे असंवैधानिक हों, क्या तब भी जब