हिंदू कोड-जारी - Page 519

504 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वे गलत हों? मैं तो हमेशा कहूँगा कि यह सलाह जो राष्ट्रपति को दी गई है, गलत सलाह है।

अध्यक्ष महोदय : हमने संविधान में यह प्रावधान स्वीकार किया है कि राष्ट्रपति द्वारा की गई कार्यवाही की आलोचना नहीं की जानी है।

सरदार बी. एस. मान : हम अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकते हैं....

डॉ. अम्बेडकर : आप सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, राष्ट्रपति के विरुद्ध नहीं।

श्री दामोदर मेनन (ट्रावनकोर-कोचीन ) : क्या राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने

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का अधिकार सदन के पास नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : वह एक अलग बात है।

अध्यक्ष महोदय : इस संबंध में मैं सदन का ध्यान हमारी क्रियाविधि नियमावली के नियम 159 के खंड ( VI ) की ओर दिलाना चाहूँगा जिसमें कहा गया है कि :

“कोई भी सदस्य बोलते समय -

( vi ) ‘‘बहस को प्रभावित करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति के नाम का प्रयोग नहीं करेगा;“

सरदार बी. एस. मान : दरअसल, सरकार राष्ट्रपति के नाम का प्रयोग कर रही है। जब मैं राष्ट्रपति की किसी कार्यवाही की आलोचना करता हूँ तो उसमें निहित निन्दा वास्तव में सरकार की या राष्ट्रपति के सलाहकारों की होती है। यह तो लोगों पर है कि वे इसे किसकी आलोचना समझते हैं। परन्तु जब आदेश राष्ट्रपति के नाम से जारी किए जाते हैं तो आलोचना भी राष्ट्रपति की होनी चाहिए। पंजाब में अभी हम राष्ट्रपति के शासन के अधीन हैं तो क्या मेरा आलोचना करने का अधिकार छिन गया है? इससे तो आने वाले समय के लिए भी सभी दरवाजे बंद हो जाएंगे। यही मेरा मुद्दा है।

अध्यक्ष महोदय : मेरा अपना विचार तो यही है कि यदि माननीय सदस्यों को आलोचना करने से नहीं रोका जाता, जैसा कि वे सदन में कर रहे हैं, तो वे अपनी आलोचना का निशाना सरकार को बना सकते हैं जो गलत सलाह दे रही है- यदि उनकी राय में यह गलत सलाह है। राष्ट्रपति द्वारा की गई कार्रवाई की जड़ यदि सरकार है, यदि उनकी राय में राष्ट्रपति यह कार्रवाई नहीं कर रहे हैं बल्कि यह सरकार है जो गलत सलाह दे रही है, तो सदस्यगण राष्ट्रपति का नाम बीच