हिंदू कोड-जारी - Page 520

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में लाए बिना सरकार को उसकी कार्रवाई के लिए आलोचना करने हेतु पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

डॉ. देशमुख : क्या हम यह भी कह सकते हैं कि हम राष्ट्रपति की आलोचना नहीं कर रहे हैं और यह कि हम सरकार की आलोचना कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय : इसलिए इसमें कोई कठिनाई कहां है? जब सदस्य सरकार के कार्यों की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हे अपने विचार बेबाक और

खुले तौर पर व्यक्त करने पर कहीं कोई प्रतिबंध नहीं है, तो उन्हे ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए या इस बात की परेशानी नहीं होनी चाहिए कि राष्ट्रपति का नाम बीच में नहीं ला सकते हैं।

सरदार बी. एस. मान : हम राष्ट्रपति का नाम बीच में नहीं ला रहे बल्कि उनकी कार्यवाही को ला रहे हैं, क्योंकि ये सरकार द्वारा की गई कार्यवाहियाँ हैं। यह तो आपके कल्पना कर लेने की बात है, ठीक वैसी ही, जैसी कि मैंने आलोचना की थी।

अध्यक्ष महोदय : मेरा ख्याल है कि मैंने अपनी बात स्पष्ट कर दी है। यदि उनके मन में यह है कि राष्ट्रपति द्वारा की गई कार्यवाही की जड़ सरकार है और वह उचित सलाह नहीं दे रही है; यदि हमले का निशाना सरकार है तो वह सरकार पर हमला करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। उन पर कोई रोकटोक नहीं है।

सरदार हुकम सिंह : मैं माफी चाहता हूँ कि हम राष्ट्रपति की आलोचना कर सकते हैं या नहीं; इस सवाल पर हुई बहस में मेरी अपील कहीं खो गई। लेकिन मेरा उद्देश्य राष्ट्रपति की आलोचना करना कदापि नहीं था। जहां तक मेरे मुद्दे का संबंध है वे कसूरवार नहीं हैं। मेरा सीधा आरोप डॉ. अम्बेडकर पर है क्योंकि उन्होंने ही मुझसे और अन्य सिखों से अपील की थी कि हमें अलगाववादी तरीके से सोचना नहीं चाहिए। परन्तु इसका दोष दूसरे पक्ष पर है। उन्हांने ही यह खेल शुरू किया और उन्हांने जब राष्ट्रपति को अनुसूचित जातियों के बारे में आदेश निकालने की सलाह दी तब हमसे दूरी बनाए रखी। यही मेरी शिकायत है। इससे पहले कि वह मुझसे अपने विचार बदलने के लिए अपील करें, और अन्याय को दूर करें, यह मेरा पहला मुद्दा है।

दूसरा मुद्दा यह है कि जब हम यह कहते हैं कि पंजाब में प्रथा बहुत सरल है और औसत नागरिक भी इसकी पर्याप्त समझ रखता है, हमारे सामने यह प्रश्न