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संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकेंगे। हम संहिता के द्वारा जो भी करेंगे पूर्ण रूप से और सीधे अनुच्छेद 14 में दिए गए निर्देश के विरुद्ध होगा। क्योंकि केवल यह कि नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास ही नहीं है लेकिन व्यक्ति समूह के लिए अलग संहिता बनाने का प्रयास होगा। इसलिए इससे पहले कि हम आगे बढं़े, या हम समय बर्बाद करें हमें इस मुद्दे पर विचार कर लेना चाहिए। और मैं निश्चित हूँ हम कुछ अलग नहीं कर रहे केवल समय बरबाद कर रहे हैं। क्योंकि अगले तीन दिनों तक खंड दो से आगे बढ़ना आसान नहीं होगा और हम नहीं जानते कितने लम्बे समय तक हम हिंदू संहिता पर बात करेंगे। एक सुझाव दिया जा चुका है कि अगर हम वास्तव में इस संहिता को पारित करना चाहते हैं यह सबसे अच्छा होगा कि एक पूरा सत्र इसी के लिए बनाया जाए। मैं सोचता हूँ कि केवल तीन दिन दिए जाने पर बहुत आगे बढ़ना सम्भव नहीं होगा, यह केवल इस सदन के समय, शक्ति और पैसे की बर्बादी होगी। इससे केवल एक ही उद्देश्य पूरा हो सकेगा वह है केवल कुछ लोगों की सनक और कल्पना या निश्चित दृढ़ या अभिरुचियां पूरा करना। यह बहुत आसान होगा कि हमें कुछ हजार लोग इस संहिता को पारित करने के विरुद्ध हमारा रास्ता रोकें! नारे लगाते मिलें, एक या दो व्यक्ति कानूनी अदालत में, संविधान के प्रावधानों के लिए नियम बनाने के लिए ही नहीं बल्कि परोक्ष रूप से जो दिया गया है उसके विरुद्ध जाना चाहें।
श्रीमती दुर्गा बाई : दूसरे लोग भी अदालत जा सकते हैं।
डॉ. देशमुख : यहाँ दोनों पक्ष हो सकते हैं। जो लोग सबसे वहाँ जाएँगे उनकी कीमत पर आपको नोटिस मिलेंगे।
श्रीमती दुर्गा बाई : पक्षपात से सम्बन्धित प्रावधानों के आधार पर दूसरे भी वहाँ होंगे।
डॉ. देशमुख : हाँ, यहाँ पर हर जगह भेदभाव है और वास्तव में इसी पर आपत्ति उठाई गई है। अगर हम इस संहिता को जैसे हैं वैसे ही पारित करते हैं तो भेदभाव होगा कुछ लोगों के पक्ष में भेदभाव होगा और कुछ अगर बहुत खराब नहीं इससे पंगु होने वालों के खिलाफ भी।
इन संशोधनों के बारे में मेरा दूसरा मुद्दा यह है कि मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधनों से सहमत नहीं हूँ। प्रकाशित सूची में उनके संशोधन नं. 15 के द्वारा वह चाहते हैं कि शब्दों, ‘‘व्यक्तियों जो धर्म से हिंदू हैं,’’ को इन शब्दों से बदल दें। ‘‘हिंदू’’ उन सभी व्यक्तियों को जो हिंदू धर्म मानते हैं कहा जा सकता हैं।’’ इस समय, जब कि यहाँ पर इतने अधिक संशोधन और इतने अधिक बदलाव