हिंदू कोड-जारी - Page 522

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हम पुत्र की परिभाषा पर खंड 3 पर चर्चा कर रहे थे, पंडित ठाकुर दास भार्गव ने वह प्रश्न उठाया था और मैंने सदन से निवेदन किया था कि इस मामले पर बाद में किसी उचित समय पर विचार किया जा सकता है जब हम निष्कर्ष पर पहुंचें....

उपाध्यक्ष महोदय : जब हम परिभाषा पर थे।

डॉ. अम्बेडकर : मेरे माननीय मित्र दत्तक पुत्र की बात कर रहे हैं। हम अभी उस पर आए ही नहीं हैं। मैं केवल यही कह रहा हूँ कि हम समय बचा सकते हैं और खंड 4 को पूरा कर सकते हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : हम इसे भाग VII तक स्थगित रखने पर सहमत थे। हम इस पर बाद में चर्चा कर सकते हैं जब यह मामला सामने आएगा।

सरदार हुकम सिंह : माननीय मंत्री जी के इस व्यवधान से मेरे मन में यह संदेह उत्पन्न हो गया है कि वे मेरी बात नहीं समझ रहे हैं, या मैं अपनी बात को स्पष्ट नहीं कर पा रहा हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : मैं समझ रहा हूँ और उनकी यह बात भी समझ गया हूँ कि और सभी प्रातों के मुकाबले पूरा पंजाब बहुत प्रगतिशील है।

सरदार हुकम सिंह : यह ठीक है कि उन्होंने मेरी बात समझ ली है लेकिन जब मैं कारण और उदाहरण बता रहा हूँ तो वे इसे समझने का कष्ट नहीं करेंगे। मैं एक उदाहरण दे रहा हूँ जहाँ रूढि़ या प्रथा इतनी जरूरी है और मैं कह रहा हूँ कि....

डॉ. अम्बेडकर : मुझे शिक्षित करने की बात यहीं छोड़ दी जाए तो बेहतर होगा। मैं यह ज्ञान फिर कभी हासिल कर लूँगा।

बाबू रामनारायण सिंह : वह तो आपको सीखना ही पडे़गा।

सरदार हुकम सिंह : केवल डॉक्टर साहब ही नहीं हैं जिन्हे शिक्षित किया जाना है बल्कि और भी कई लोग हैं। यदि माननीय सदस्यों से मुझे वोट देने के लिए गुजारिश करनी हो तो मुझे उन्हें विश्वास दिलाना होगा कि........ डॉ. अम्बेडकर : बाद में।

उपाध्यक्ष महोदय : अब सुझाव यह दिया गया है कि यह चर्चा बंद की जानी चाहिए। लेकिन दूसरे स्थान पर जब यही मामला खंड 3 में उठाया गया था तब पुत्र की परिभाषा के संबंध में यह सुझाव दिया गया था कि दत्तक उत्तराधिकारी भी पुत्र होना चाहिए। जब हम खंड 7 पर आएंगे, जहां निषिद्ध स्तरों का उल्लेख किया गया है, तब हम विचार करेंगे कि क्या इसे शामिल किया जाना चाहिए या एक स्पष्टीकरण जोड़ा जाना चाहिए। इसे हम तभी उठाएं जब हम खंड 7 पर आएंगे।