हिंदू कोड-जारी - Page 524

509 कुछ माननीय सदस्य : जी हां, जी, हां।

कुछ माननीय सदस्य : जी, नहीं। जी, नहीं।

कैप्टन ए. पी. सिंह : कल हमारी छुट्टी होनी चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय : ऑर्डर पेपर में बहुत सारा काम दर्ज है। हमने खंड 4 भी अभी समाप्त नहीं किया है। इस खंड में कुल मिलाकर 55 खंड हैं। ऐसी स्थिति में मुझे लगता है कि कल बैठक करनी पड़ेगी।

कैप्टन ए. पी. सिंह : इस विधेयक के बारे में और दूसरे कई विषयों पर हमें काफी कुछ अध्ययन करना है। कुछ समय हमें भी चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय : कल प्रश्नकाल नहीं है। मुझे प्रातः 9.30 बजे बैठक करने में कोई आपत्ति नहीं है। हम कल 9.30 बजे बैठेंगे। कल हमारा यही काम होगा। कुछ माननीय सदस्य : जी हां।

एक माननीय सदस्य : कब तक।

उपाध्यक्ष महोदय : हमेशा की तरह 1.15 बजे तक।

एक माननीय सदस्य : पूर्वाह्न 9.30 बजे से दोपहर बाद 2.00 बजे तक।

पंडित मैत्रा (पश्चिम बंगाल) : 12.00 बजे तक महोदय। हमारे पास और काम भी हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : इस पूरे विधेयक का यह सबसे विवादास्पद खंड है (व्यवधान)। महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि खंड 4 पूरे विधेयक में सबसे विवादास्पद है। दरअसल, जब हम खंड 2 पर विचार-विमर्श कर रहे थे, जिसमें सदन का इतना समय लगा, विवादास्पद मुद्दे वास्तव में ऐसे थे जो खंड 4 से संबंधित थे। जैसा कि हम जानते हैं, यह मानवीय स्वभाव है जो अपनी प्रथाओं से स्नेह रखता है। जिन समाजों में कानून निर्माण की शक्ति पूरी तरह विकसित नहीं है, लोगों का आचरण प्रथाओं द्वारा नियंत्रित होता है और ये प्रथाएं लोगों के हृदय में इतने गहरे बस जाती हैं कि लोग उन पर लागू कानून के बजाए इन्हें ही महत्व देते हैं। इसीलिये जब हम देशभर में घूमते हैं तो जो सवाल हमसे किया जाता है वह है कि “हमारी प्रथाएं सुरक्षित रखी जाएंगी या नहीं?” अभी कुछ दिन पहले मैं अपने एक मित्र के घर गया था जो भारत सरकार में मंत्री हैं और उनके अर्दली ने मुझसे पूछा ”सर, आप हिंदू कोड बिल पर क्या कर रहे हैं?” मैंने उसे बताया कि हिंदू कोड बिल पर विचार- विमर्श अभी चल रहा है और इसके कुछ भाग पारित कर दिए