हिंदू कोड-जारी - Page 536

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वहाँ कोई सामान्य प्रथा नहीं है। इस बिंदु से ‘हिंदू संहिता’ का पुनर्विलोकन करते हुए मेरी राय में किसी भी रिवाज में कोई अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। श्रीमान्, कल मैंने बताया था कि डॉ. अम्बेडकर तलाक के प्रथागत आधार अपनाने की तैयारी कर रहे हैं जैसा मद्रास व बम्बई अधिनियम में दिया गया है। मैं इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहता हूँ। इस आधार को अपनाकर आपको विवाह-विच्छेद का कानून बिगाड़ना नहीं चाहिए क्योंकि यह प्रथम समय है जब हम विवाह विच्छेद का कानून बना रहे हैं। आप उच्च वर्ग की सामाजिक अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप कर रहे हैं। मैं विवाह के विच्छेद के कानून का पक्षधर हूं। मूझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि पूरे देश में लागू करने के लिए हमारा एक ही विवाह-विच्छेद कानून हो। (मैं देश के एकीकरण के लिए किए गए प्रयत्नों में आपके साथ हूं।) मैं जानता हूं कि पंजाब में, जहां का मैं निवासी हूं और देश के अन्य भागों में, जिनके बारे में कुछ ज्ञान रखता हूं जहां विवाह-विच्छेदन इतना सरल है कि एक कहावत है-एक संचलित ‘‘जब मियां-बीबी राजी, तो क्या करेगा काजी।

मैं नहीं चाहता हूं कि विवाह-विच्छेद केवल कहने मात्र से ही हो जाना चाहिए, यह सर्वथा असंगत होगा। एक रिवाज के अनुसार किसी भी स्त्रि के भरण-पोषण पर जितना उसके पति ने व्यय किया है, उतनी राशि लौटा कर वह स्त्री विवाह-विच्छेद सकती है। मैं इस रिवाज के सर्वथा विरुद्ध हूं क्योंकि यह हमारी नैतिकता का हनन करता प्रतीत होता है। मैं अपने विचार प्रकट करने के लिए आपका समय ले रहा हूं, माननीय डॉ. अम्बेडकर अपने कार्य में व्यस्त हैं और मुझे नहीं सुन रहे है। आपको विवाह-विच्छेद के एक समान और एकरूप प्रावधान करने चाहिए। विवाह-विच्छेद के आधार के मुद्दों में किसी भी रिवाज के हस्तक्षेप को नहीं आने दीजिए अन्यथा हम संकट में घिर सकते हैं।

मैं बम्बई के मद्रास अधिनियमों का अनुमोदन नहीं करूंगा। मैं अपनी आवाज उनके विरुद्ध केवल इसलिए नहीं उठाऊंगा क्योंकि मैं बम्बई और मद्रास अधिनियम के खिलाफ हूं बलिक जहां तक द्विविवाह का संबंध है, मैं उनका उतना ही विरोध करता हूं जितना अन्य सब मैंने ध्यान दिया है कि इन संशोधनों के पुनर्विलोकन में केवल एक ही उद्देश्य है कि मैं उन सही सिद्धांतों के, जो विवाह कानून से संबंधित हैं, अनुपालन किए जाने को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हूं। डॉ. अम्बेडकर ने रूढि़वादी आधार ग्रहण करने के लिए कहा है परन्तु प्रत्येक प्रचलित रिवाज को नहीं अपनाया जा सकता है, यदि ऐवसा किया गया जैसा कि इस विधेयक में किया हुआ है, तो ‘हिन्दू संहिता विधेयक का पूर्ण उद्देश्य ही विखण्डित हो जायेगा। मैं चाहता हूं कि विवाह-विच्छेद के लिए केवल एक ही आधार होना चाहिए। यदि विवाह-विच्छेद