हिंदू कोड-जारी - Page 543

528 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शब्द-कोश में इस शब्द का अर्थ देख सकते हैं बल्कि आप में से कुछ सज्जनों ने अवश्य ही इसे पहले से ही देख रखा होगा। इसमें कोई शक नहीं है कि डॉ. अम्बेडकर एक बड़े विद्वान हैं; उन्होंने तो अवश्य ही इसे शब्द-कोश में देखा होगा।

डॉ. अम्बेडकर : नहीं, मैंने नहीं देखा है।

बाबू रामनारायण सिंह : परन्तु उन्होंने अपनी विद्वत्ता ताक में उठा कर रख दी है और अनजान बनने की कोशिश कर रहे हैं। आखिरकार क्या है ‘कानून’? आज कानून का अर्थ है एक प्रभुसत्ता अथवा सेना या पुलिस की सहायता से व्यवस्थापन करने वाला और पूरे समाज पर इस व्यवस्था को जबरदस्ती लागू करने वाला प्रधान समाज महोदय, कानून का यह अर्थ नहीं है। कानून का, शब्द-कोश के अनुसार, अर्थ है- कानून कुछ नहीं है बल्कि लोगों की इच्छा को प्रकट करने का नाम कानून रखा गया है- जिसका, दूसरे शब्दों में अर्थ है- जो भी समाज की इच्छा है, उसे कानून का रूप देना कानून कहा जाता है। इन लोगों ने अब सर्वोच्च पद प्राप्त कर लिया है, पुलिस और सेना अब इनके अधीन हैं और पुलिस और सेना की सहायता से पार्टी अनुशासन के नाम पर और उसकी मदद से वे कुछ भी अनुमोदित करवा सकते हैं।

श्रीमती दीक्षित (मध्य प्रदेश) : वहाँ कोई पार्टी अनुशासन नहीं है।

बाबू रामनारायण सिंह : वहाँ पार्टी अनुशासन है और आप इसे स्वीकारेंगे।

श्रीमती दीक्षित : नहीं ऐसा नहीं है।

बाबू रामनारायण सिंह : अच्छा, ‘हाँ’ अथवा ‘नहीं’ से क्या प्रकट होगा? मैं स्थिति जानता हूँ।

महोदय, मेरे कहने का अर्थ है कि ऐसे कानून द्वारा अत्यधिक अन्याय हो जाता है। यह इस देश के हित में नहीं है और ना ही इस देश के नागरिक ऐसा चाहते हैं, और इसलिए, इसे मंजूरी दे कर कानून नहीं बनाना चाहिए। जैसा मैंने आपको बताया कि बहुत-सी क्रांतियाँ हुईं, महान धार्मिक क्रांतियाँ हुई परन्तु ‘वेदों’ के मूल सिद्धांत कभी नहीं बदले। कलम की एक नोक से ही डॉ. अम्बेडकर अब ‘वेदों’ को एक बाधा, मानते हुए चाहते हैं कि यह विधेयक किसी भी दशा में अनुमोदित नहीं किया जाना चाहिए। जैसा कि विभिन्न मूल-पाठ और नियम हैं, जिन्हें प्रतिपादित किया जाता है। बहुत से संत (ऋषि) हमारी धरती पर अवतरित हुए। श्री ठाकुर दास ने उनका उल्लेख किया था। वह इस प्रकार हैः