530 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिसके लिए कहा गया है कि किसी गुफा में छिपा हुआ है, इसे ढूँढ निकालना असाध्य कार्य था। कितने सुन्दर प्रकार से, इसलिए यह कहा गया हैः ‘‘महाजनो येना गताः सा पन्थाः’’ -‘‘वह, वास्तव में, वह मार्ग है जिस पर महान व्यक्ति ही गए हैं’’। ऐसी परिस्थितियों में, जब ‘वेद’ कुछ कहते हैं, शास्त्रों में कुछ और है, आचरण संहिताएँ अन्य कुछ विधान बनाए हैं और सही चुनाव करना दुष्कर हो जाता है तब ऐसे में क्या करना चाहिए? इसलिए कहा गया हैः ‘‘महाजनो ये गताः सा पन्थाः’’ - अर्थात् महान व्यक्तियों द्वारा चुना गया मार्ग ही अपनाना चाहिए। वे लोग, जो हमारे देश में आज महान कहे जाते हैं, ऐसे कार्य कर रहे हैं और करना चाहते हैं जिनहें आज भी किसी के भी द्वारा स्वीकार करने योग्य नहीं हैं। आने वाले समय में, फिर इसे, कौन स्वीकार करेगा? मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि इस विषय को, सुस्पष्ट रूप में, और इस प्रकार से कि प्रत्येक व्यक्ति सोच सके और अपनी बात कह सके, विचारार्थ हेतु लेना चाहिए।
महोदय, रस्मों और रीति-रिवाजों के संबंध में वे कहते हैं कि रीति-रिवाज विद्यमान नहीं हैं। ऐसे व्यक्ति रीति-रिवाजों को दूर हटाने के लिए तैयार हैं और उन्हें निश्चित तौर पर दूर भी कर देंगे। उन्हें ज्ञान होना चाहिए कि ‘धर्मग्रंथों,’ ‘वेदों’ और ‘‘पुराणों’’ को तलवार की धार पर अथवा किसी भी प्रकार के निग्रह-बल द्व ारा प्रवर्तित नहीं किया गया था। ये वे अधिनियम थे, जो बनते ही हर एक व्यक्ति द्वारा अपना लिए गए थे। कुछ ने इन्हें ‘‘रीति-रिवाज’’, ‘‘खानदानी रीति-रिवाज’’ नाम दिया तो कुछ ने ‘‘खानदानी-आचरण’’ नाम दिया जबकि कुछ उन्हें ‘‘प्रथाएँ’’ व ‘‘परम्पराएँ’’ कहते हैं।
रामायण में स्थान विशेष में लिखा हैः
‘‘रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्रान जाहि पर वचन न जाई’’,
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(रघुवंशियों की सदैव प्रचलित परम्परा है। चाहे जान चली जाए परन्तु कभी वचन से पीछे नहीं हटना है।)
यह रघुकुल की रीति थी, जी हाँ-एक परम्परा, एक प्रथा, जान की कोई परवाह नहीं करनी चाहिए, चाहे प्राणों का बलिदान ही देना पड़े, परन्तु दिए गए वचन को, किसी भी कीमत पर तोड़ना नहीं चाहिए आज क्या आवश्यकता है यह सब कहने की? वाह-वाह, डॉ. अम्बेडकर की प्रतिभा या इस सरकार की प्रतिभा-क्या बात है जो हमें बताती है कि रीति-रिवाजों के संबंध में बात मत करो और सत्य व प्रथाओं को त्याग दो। यह समझना अति आवश्यक है कि रीति-रिवाज हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण थे यथा ‘‘रघुकुल रीति सदा चलि आई प्राण जाहिं पर वचन न जाई’’