हिंदू कोड-जारी - Page 546

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जरा देखो तो कि जो शख्स आज का मनु दिखना चाहता है, वह कहता है कि कोई प्रथा और कोई परम्पराएँ आदि जो भी प्रचलित हैं, वे होनी ही नहीं चाहिए; हमें उन सबको त्याग देना चाहिए।

श्रीमती दीक्षित : परन्तु आज क्या घटित हो रहा है?

बाबू रामनारायण सिंह : यदि आपकी इच्छा होती तो आज ऐसा हो सकता था। अब हम विवाह-विच्छेद के प्रश्न पर आते हैं। हमारे देश में, पाँच-छः समुदाय ऐसे हैं जिन्हें हम जानते हैं कि वे संख्या में तीन-चार करोड़ हैं। उनके लिए वे इन नियमों को बना रहे हैं, जिससे कि उनके लिए विवाह-विच्छेद का अधिकार सुरक्षित रखा जा सके। शेष 90 फीसदी समाज के लिए, हम जानते हैं कि विवाह-विच्छेद प्रतिदिन की दैनंदिन क्रिया है। और महोदय, यह विवाह-विच्छेद दिया कैसे जाता है? दो, चार अथवा उनमें से पाँच एकत्रित हो कर बैठते हैं; दोनों विरोधी दल आते हैं और घास के कुछ तिनके तोड़ते हैं; और उनके आपसी संबंध टूट जाते हैं - हो गया ‘‘विवाह विच्छेद’’। न तो इस पर फूटी कौड़ी ही खर्च हुई और न ही कोई परेशानी हुई। हमारे आदरणीय, डॉ. अम्बेडकर अछूतों के शुभचिन्तक हैं और उन्हें भी यह जानना चाहिए कि ऐसे शुभचिन्तक से उन्हें दूर रहना चाहिए। अब उन सबको तलाक के लिए जिला न्यायाधीश के पास जाना पड़ेगा। इस कार्यवाही का अर्थ कितना अधिक

खर्च और परेशानी है? तब ही विवाह-विच्छेद की स्वीकृति प्राप्त होगी।

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बाबू रामनारायण सिंह : वकील ही, वकीलों को जीविका दे रहे हैं।

पं. ठाकुर दास भार्गव : ‘पंचायत’ को विवाह-विच्छेद का पंजीकरण करने के अधिकार दिए गए हैं।

बाबू रामनारायण सिंह : चलों, यदि यह ‘पंच’ के हाथ में है तो, यह कुछ सीमा तक सही है, परन्तु वह भी तो ‘सरकारी पद’ ही होगा। मेरा दावा है कि विधेयक अनुसूचित होगा। यदि इस कानून को भाड़ में जाने दें तो हम देखेंगे कि पूर्व प्रणाली कितनी आसानी से कार्य कर रही है। हमारे पास ‘पंचायत’ और ‘पंच’ हैं; और हमारे देश में रीति-रिवाज व रस्में मान्य हैं और वे निरन्तर प्रचलन में रहेंगी तथा लोग उन्हें स्वयंमेव ही अपनाते रहेंगे। यदि कोई कानून बनाया जाता है अथवा कोई निर्णय लिया जाता है तो यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि लोगों द्वारा शांतिपूर्वक स्वीकृत हो जाएगा और वे इसके विरुद्ध जाने की सोचें भी नहीं। परन्तु वह कानून, जो यहाँ पारित किया जा रहा है, वह ऐसा है कि हमारे देश के नागरिक इसे तोड़ने में गर्व का अनुभव करेंगे, और इस पर अमल नहीं करेंगे। यह कुछ नहीं केवल उन लोगों