खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 55

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री झुनझुनवाला : श्रीमान, मैंने दो संशोधनों के विकल्प दिए थे। उनमें से एक संशोधन इस प्रकार पढ़ा जाए-

‘‘यह संहिता, हिन्दुस्तान अर्थात् भारत के नागरिकों पर लागू होनी चाहे वे किसी भी जाति, धार्मिक मान्यता के हों और किसी धर्म से सम्बन्धित हों या मानते हों।’’

विकल्प, मैंने दूसरा संशोधन प्रस्तुत किया जिसे इस प्रकार पढ़ें :

‘‘यद्यपि यह दिया गया है, उपर्युक्त खंडों में कुछ शामिल होने के बावजूद भी यह संहिता लागू नहीं होगी जब तक कि ऐसा व्यक्ति अपना नाम ऐसे प्राधिकरण में पंजीकृत न करवाएँ और वह भी इसके बाद संसद द्वारा प्रयुक्त तरीके से, संहिता के लागू होने के एक वर्ष के अंदर, जब नाबालिग बालिग हो जाए।’’

मैं सदन को यह आश्वासन देना चाहता हूँ कि ये मेरे संशोधन मिलावटी नहीं है; न मैं संहिता के सभी प्रावधानों का विरोध ही कर रहा हूँ। मेरा प्रथम संशोधन प्रस्तुत करने का उद्देश्य है, जैसा कि मेरे माननीय मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद ने संकेत दिया है, हम बहुत से कानून पारित कर रहे हैं जो उच्च न्यायालय द्वारा या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किए जा रहे हैं। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि इसके पहले कि हम ऐसे किसी अधिनियम, कानून या विधेयक को लेकर हमें आश्वस्त हो जाना चाहिए कि हम संविधान के अनुसार कर रहे हैं। अगर हम कोई कानून बनाते हैं और बाद में वह कानून अवैध घोषित हो जाता है, इस सदन का केवल समय बरबाद करना और पैसा बरबाद करना ही होगा। इसका कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं होगा। संविधान के खंड 15 के अन्दर यह दिया हुआ है कि राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। संशोधन जिसे मैंने प्रस्तुत किया है इसमें संहिता हिन्दुस्तान के अर्थात् भारत के सभी नागरिकों पर लागू होगी, जबकि खंड जैसा यह है एक विशेष वर्ग के लोगों तक सीमित है। अगर यह विधेयक जो हम पारित कर रहे हैं अच्छे के लिए है तो यह सभी व्यक्तियों के लिए अच्छा है। यह ठीक नहीं है कि हम एक विशेष समुदाय का दूसरे के विरुद्ध भेदभाव करें। हमें एक व्यक्ति समूह जो एक धर्म को मानते हों और दूसरे के विरुद्ध भेदभाव करें। हमें एक व्यक्ति समूह जो एक धर्म को मानते हों और दूसरे व्यक्ति समूह जो दूसरा धर्म को मानता है, अगर हमारा विधेयक उनके लिए है, तो उनमें भेदभाव नहीं करना चाहिए। अगर वह उनके अच्छे के लिए नहीं है तो यह ठीक नहीं है कि हम किसी विशेष समुदाय या जाति जो एक विशेष समुदाय या जाति जो एक विशेष धर्म को मानते हैं पर कोई कानून या अधिनियम थोपें।