खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 56

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एक मुद्दा जो मैं बताना चाहता था, वह यह है : सदन को देखना चाहिए क्या वह विधेयक संसद द्वारा बनाया जा सकता है विशेषरूप से जब यह एक विशेष प्रकार के लोगों, जो एक विशेष प्रकार का धर्म मानते हैं तक सीमित है। हम ऐसा विधेयक संविधान को अनुच्छेद 25 के अंतर्गत ही बना सकते हैं। चलिए, देखें, अनुच्छेद 25 के प्रावधान, जो हमें ऐसा विधेयक बनाने के लिए अधिकार देते हैं, क्या है। अनुच्छेद 25 (1) पढं़े :

‘‘बशर्तें कि लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य और इस भाग के दूसरे प्रावधान सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म के बारे में अंतः चेतना है और प्रदर्शन करने, मानने और प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार है।’’

विधेयक के खंड 2 संहिता के लागू होने के बारे में इस प्रकार है :-

‘‘(1) यह संहिता लागू होगी-

(क) सभी हिंदुओं पर, जैसा कि कहा जा सकता है, सभी व्यक्ति जो किसी भी रूप में या उसके विकास, हिंदू धर्म को मानते हैं, जिसमें वैष्णव या वीर शैव या लिंगावत और ब्रह्म के उपासक प्रार्थना या आर्य समाज के अनुयायी सम्मिलित हैं।

(ख) कोई भी व्यक्ति जो धर्म से बौद्ध, जैन, सिख है।

(ग) ( i ) कोई भी बालक, वैध या अवैध जिसके माता-पिता में से कोई एक

इस धारा के अर्थ में हिंदू है, बशर्तें कि ऐसे बालक को समुदाय, समूह

या परिवार जिससे उसका सम्बन्ध हो या था के किसी सदस्य द्वारा

पाला गया हो; और

( ii ) ...............

(घ) उस पर हिंदू धर्म में परवर्तित हुआ हो

(2) यह संहिता कोई भी व्यक्ति, जो धर्म से मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी न हो, पर लागू होगीः

बशर्तें अगर यह सिद्ध हो जाए कि ऐसा व्यक्ति हिंदू अधिनियम या किसी रिवाज या उस अधिनियम के किसी हिस्से के प्रयोग से शासित नहीं होता, अगर यहाँ दिए गए मामले से सम्बन्धित यह संहिता पारित नहीं होती, तब यह संहिता उस व्यक्ति पर उन मामलों के सम्बन्ध में लागू नहीं होगी।

(3) ‘‘हिंदू’’ का स्पष्टीकरण इस संहिता के किसी भाग ‘‘हिंदू’’ का यह अर्थ होगा जैसे कि इसमें वह व्यक्ति जो यद्यपि धर्म से हिंदू नहीं है फिर भी इस संहिता के प्रावधान से शासित होता है।