हिंदू कोड-जारी - Page 555

540 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तो मुझे मालूम है तब मुझ पर कितना ध्यान दिया जाता। एक सामान्य नागरिक तो एक राशन-कार्ड लेने में ही बहुत कठिनाइयाँ झेलता है। क्या आप सोच सकते हैं कि एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो गरीब और अनभिज्ञ है उसके लिए कानून की अदालत में जाकर तलाक प्रमाण-पत्र लेना होगा?

पं. एम. बी. भार्गव (अजमेर) : भविष्य में अदालतें अधिक कार्यकुशल हो जायेंगी।

डॉ. सी. डी. पाण्डे : चीजों को वैसी ही स्वीकार कर लेना चाहिए जैसी वे हैं। आप चीजों के अचानक से सुधरने की आशा नहीं कर सकते हैं। कठिनाइयाँ उत्पन्न करने के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है। आप रिवाजी कानून को रद्द क्यों करना चाहते हैं? क्या आपने रिवाजी कानून समाप्त करने के लिए कोई प्रतिवेदन प्राप्त किया है? आप इस पर जोर क्यों डाल रहे हैं? आप कठिनाइयाँ उत्पन्न करने के लिए दबाव क्यों डाल रहे हैं?

श्री ए. सी. शुक्ल (मध्य प्रदेश) : क्योंकि यह लोकनीति के विरुद्ध है।

डॉ. सी. डी. पाण्डे : नैतिकता को कानून द्वारा शासित न होने दें। यदि आपको ऐसा कोई भ्रम है कि आप कानून द्वारा लोक-नैतिकता को शासित कर सकते हैं, तो आप गलती पर हैं।

श्री लक्ष्मण (त्रावनकोर-कोचीन) : वे अध्यक्ष को संबोधित नहीं कर रहे हैं। वे सदस्यों को वैयक्तिक रूप से ‘आप’ कह कर संबोधित कर रहे हैं।

डॉ. सी.डी. पाण्डे : क्षमा करें। ‘आप’ कह कर संबोधित करने का एक चलन है। ‘आप’ का अर्थ वैयक्तिक तौर पर कोई सदस्य नहीं है। इसका अर्थ यहाँ विधिकर्ता हैं?

माननीय उपाध्यक्ष : कृपया शांत रहें।

डॉ. सी. डी. पाण्डे : मैं बीच में व्यवधान डालने का बुरा नहीं मानता हूँ, क्योंकि जो मसला मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ वह लोगों की इच्छा पर जारी किया जाना है। मैं रीति-रिवाजों की व्यापकता को जानता हूँ। जो कठिनाइयाँ उत्पन्न होंगी वे बहुतायत में होंगी। आप मामलों को सुलझाने के लिए तंत्र नहीं पा सकोगे। मामले ऐसे दूर-दराज के स्थानों पर होंगे जहाँ कोई सरकारी तंत्र नहीं होगा। लोग अपने झगड़ों को आपसी सामंजस्य से सुलझा लेंगे। सामाजिक मामलों में एक स्वचालित व्यवस्था होती है। समाज की उस व्यवस्था में व्यवधान पड़ जायेगा। आप अपने ऊपर एक उत्तरदायित्व लेना चाहते हैं जिसके लिए आप तैयार नहीं है। और तो