हिंदू कोड-जारी - Page 564

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श्री ए.सी. शुक्ल : जब वे शिक्षित हो जायेंगे तो वे माँग करेंगे।

चौ. रणबीर सिंह : शायद श्री शुक्ल यह नहीं जानते हैं कि हमारे पंजाब में कितने बहुआयामी व्यक्तित्व पैदा हुए हैं जिन्होंने हमारे देश के प्राधिकरणों को चुनौती दी है, यद्यपि, मैं उनका समर्थन नहीं कर रहा हूँ लेकिन जब गत वर्षों में हिंदू बहुल क्षेत्रों में किसी ने एक भी कांग्रेस प्रत्याशी को हराया हो, लेकिन पंजाब में हरियाण् ा के एक निर्वाचन-क्षेत्र में, जो हिंदू बहुल क्षेत्र है, चौ. छोटू राम ने एक कांग्रेस प्रत्याशी को हरा दिया।

डॉ. अम्बेडकर : चौ. छोटू राम हिंदुओं का बड़ा मित्र है।

चौ. रणबीर सिंह : यदि माननीय डॉ. अम्बेडकर के पास इसके बारे में कोई कागजात होते या अन्य कोई प्रमाण हो तो मैं उसे मानने को तैयार हूँ। लेकिन जहाँ तक उनके उद्देश्य का संबंध है मैं उसका विरोधी नहीं हूँ। मैं एक-विवाह-प्रथा का समर्थक हूँ और मैं चाहता हूँ कि किन्हीं विशेष परिस्थितियों में तलाक के लिए प्रबंध किया जाना चाहिए ताकि जब भी दोनों पक्षों में, पुरुष के साथ ही साथ स्त्री द्वारा दोनों के साथ रहने में कोई कठिनाई आड़े आ जाए तो उस कठिनाई से उनको बचाने के लिए कोई एक रास्ता अवश्य ही निकाला जाना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही मैं, यह कहे जाने पर कि यह प्रयास कुछ नहीं है मात्र सत्ता का दुरुपयोग करने वालों का कार्य है, कुछ भी सहायता नहीं कर सकता हूँ, क्योंकि हमें इस हिंदू संहिता विधेयक को केवल उन्हीं लोगों पर लागू करना है जो इसके द्वारा शासित होना चाहते हैं।

इस हिंदू संहिता विधेयक का प्रश्न सदन में रखने से पूर्व, इस विधेयक ने बहुत से महीने लिए हैं और बहुत से दिन इस पर खर्च किए गए हैं, मैंने कुछ मिनट झपटने का कठिन प्रयास किया था जिससे कि मैं अपने विचार प्रकट कर सकूँ पर दुर्भाग्य से मुझे मौका नहीं मिल पाया। बदकिस्मती से, जब सरदार मान इसके बारे में बोले तो, सही बात पर आने के स्थान पर उन्होंने स्वयं को सिख धर्म की भूल-भुलैया में भटका दिया, शायद उन्होंने सोचा होगा कि इस प्रकार से उनके सुझाव अधिक प्रभावशाली रहे तो अथवा कोई अन्य कारण रहे होंगे तो भी मैं सोचता हूँ कि यह प्रश्न केवल सिखों से ही संबंधित नहीं है, यह तो पूर्ण पंजाब के रिवाजी कानूनों से संबंध रखता है। मैं माननीय डॉ. अम्बेडकर के ध्यान में लाना चाहता हूँ कि यहाँ तक कि ऐसे समय में भी जब देश व समाज में रहन-सहन के रीति-रिवाज और ब्राह्मणवादी नियम दृढ़ता से लागू किए जाते थे। उदाहरण के लिए कोई भी किसी दिशा विशेष में सोमवार, मंगलवार अथवा शनिवार को जा नहीं सकता था। पंजाब में जाटों की सैन्य जाति, जिससे मैं और माननीय सरदार बलदेव सिंह संबंधित हैं,