हिंदू कोड-जारी - Page 566

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पर, यदि कोई असाधारण कठिनाई उत्पन्न नहीं होती है तो यह सरलता से रिवाज बन जाना चाहिए कि वे पुनः विवाह कर सकें, परन्तु आपने यह प्रतिबंध क्यों रखा है? सामान्यतः लोग अपनी इच्छानुसार द्विविवाह नहीं करते हैं लेकिन परिस्थितियों द्वारा उन पर जोर डाला जाता हैं यदि एक भाई की मृत्यु हो जाती है, तो उसके भाई को अपनी इच्छा के विरुद्ध द्विविवाह प्रथा को स्वीकार करना होगा।

श्रीमती दीक्षित : मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ। एक स्त्री है जिसके चार-छः बच्चे हैं, उधर उसके पति के भाई की पत्नी है, उसके भी चार-छः बच्चे हैं। यदि दोनों को एक साथ रहने दिया जाए तो क्या उनके एक साथ रहने से दो पत्नियों की सुलभता के कारण उनमें आपसी वैमनस्य की भावना उत्पन्न नहीं होगी, क्या किसी का बलपूर्वक उसकी इच्छा के विपरीत दूसरे पुरुष से विवाह करवाना, यह सिद्धांतों के अनुसार अन्यायपूर्ण नहीं है? सरदार हुकम सिंह (पंजाब) : भगवान की इच्छा।

चौ. रणबीर सिंह : यदि आपका इस सबसे अर्थ पुनर्विवाह है, तो मैं कहूँगा नहींः पुनर्विवाह केवल तभी संभव है जब यह समाज द्वारा नियमित रूप से स्वीकृत किया गया हो, लेकिन ऐसी बहुत-सी स्त्रियाँ हैं जो अपनी इच्छा प्रकट नहीं कर सकती हैं। अपनी पत्नी की मृत्यु के चौदह-पंद्रह दिन पश्चात् एक पुरुष अपनी यही इच्छा प्रकट कर सकता है, परन्तु स्त्रियाँ हमारे समाज के निराले ढाँचे के कारण जहाँ यह असंभव है, और उसमें बदलाव आने में अत्यधिक समय की आवश्यकता है, ऐसा नहीं कर सकती हैं। परन्तु यदि उनका अर्थ था कि एक भाई है, जिसके दो या तीन बच्चे और पत्नी है और उस भाई का एक भाई है जिसका अंतिम समय निकट है, और उसके भी दो या तीन बच्चे और उसकी पत्नी है, और उन्हें साथ रहना है तो यह कठिनाइयाँ उत्पन्न करेगा और परेशानियाँ उठ खड़ी होंगी। यदि वे उन्हें जानना चाहती हैं, तो मैं भी उसी बिंदु पर आ रहा हूँ। मैं स्वीकार करता हूँ और समाज में प्रत्येक व्यक्ति को स्वीकार करना होगा कि कोई भी स्वेच्छा से द्विविवाह को प्रश्रय नहीं देगा तथा चूँकि स्त्री भी असहाय है, क्योंकि वह अपने बच्चों को प्यार करती है और वह दो या तीन अनाथ बच्चों को नहीं छोड़ सकती है, वे कहाँ आश्रय पा सकेंगे। वह यह नहीं कह सकती है कि वह पुनः विवाह को इच्छुक है और घर-परिवार के अन्य सदस्य भी बच्चों को नहीं छोड़ सकते हैं, तो प्रश्न उठता है कि क्या वह अपने बच्चों को अपने साथ ले जाए। परन्तु हमारे समाज में यह रिवाज है और मैं सोचता हूँ, आप कोई भी कानून लागू कर सकते हैं पर आप इसको बदल नहीं सकते हैं। यह मजाक का विषय नहीं है। वे स्वयं इसे बदल सकते हैं पर आप आज इसे नहीं परिवर्तित कर सकते हैं।