हिंदू कोड-जारी - Page 567

552 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हमारे समाज में एक दूसरा रिवाज है। यह उनका विश्वास है कि यद्यपि किसी परिवार विशेष से संबंधित कोई सबसे मूर्ख व्यक्ति भी अपने बच्चों को दूसरे परिवार में जाने की अनुमति नहीं देगा...., यदि कोई पुरुष ऐसा करने का प्रयत्न करता है तो हमारे समाज में उसे कठोर दण्ड दिए जाने का विनिर्धारण किया गया है। यहाँ तक कि आप कहते हैं कि हमारा समाज पिछड़ा हुआ है और उसे सुधारना अत्यधिक दुष्कर कार्य है, इस प्रकार का कार्य करने का परिणाम हम लोगों में अभी भी कत्ल है। यदि आप चाहते हैं कि हमारे समाज में कत्ल और हत्या के अपराधों में वृद्धि हो जाए, पंजाब पहले से ही कत्ल और हत्या की वारदातों के लिए मशहूर है, ऐसे कत्लों आदि के लिए बहुत से लोगों को फाँसी हो गई है- यदि आप उनकी संख्या में वृद्धि करना चाहते हैं तो आपको उन पर किसी भी प्रकार के नियम और अधिनियम तत्काल लागू करने की स्वतंत्रता है। परन्तु यदि आप हत्या और कत्ल और मौत की सजा को कम करना चाहते हैं, तो मैं आपसे श्री भट्ट अथवा श्री भार्गव के संशोधन को स्वीकारने का अनुरोध करता हूँ।

इसलिए मैं कह रहा था कि या तो एक स्त्री को, यदि वह अपने बच्चों से प्रेम करती है, शेष जीवन भर उसे एक विधवा के रूप में रहने के लिए विवश किया जायेगा, जो कि उसके समुदाय में पहले कभी नहीं हुआ होगा, अथवा यदि वह अपने बच्चों से प्यार नहीं करती हैं, तो यह उन्हें रात्रि समय कहीं और चुपके से ले जायेगी और यदि वह किसी निडर व्यक्ति से मिलती है जो उसे कहता है कि जो लोग उसका अहित करना चाहेंगे उन सबको वह देख लेगा, तो इस सबका परिणाम या तो यह होगा कि वह पुनः विधवा हो जायेगी या फिर उसके पति को सूली पर लटका दिया जायेगा। परन्तु; किसी भी तरह से वह एक सौभाग्यशाली पत्नी नहीं रह पायेगी, यद्यपि यह एक बड़ी और दहला देने वाली बात है, परन्तु वास्तविकता यही है।

तब प्रश्न आता है सगोत्र विवाह का। कितने स्त्री-पुरुष शहरों में रहते हैं? इस हिंदू संहिता विधेयक के संबंध में मैं अपनी स्वयं की प्रतिक्रिया व्यक्त करना चाहता हूँ। इस सदन में अधिकांशतः सदस्य शहरों से आते हैं। जो शहरों में पैदा हुए और वहीं पल कर बड़े हुए हैं वे अपने विचार, शहरी नियमों, अधिनियमों और रीति-रिवाजों और आचरणों के अंतर्गत सीमित रखते हैं। वे सोचते हैं कि शहरी और ग्रामीण जीवन के मध्य विशाल अंतर है, उन्हें इसका कोई अनुभव नहीं है। मैं एक सामान्य उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ। जैसे कि शहर का एक मसला लेते हैं। यदि वहाँ एक स्त्री विवाह न करने का निर्णय लेती है तो किसी को भी उस पर आपत्ति नहीं होगी। परन्तु किसी गाँव में जैसे ही कोई कन्या 16 वर्ष की उम्र प्राप्त