हिंदू कोड-जारी - Page 569

554 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री ए. सी. शुक्ल : क्या यह लाभप्रद प्रक्रिया है?

चौ. रणबीर सिंह : मैंने इस संबंध में कोई भी दावा नहीं किया है। मेरी उन्हें चिढ़ाने की ऐसी कोई भी मंशा नहीं है जैसी माननीय डॉ. की थी। उनके प्रति विपरीत से मैं कोई भी गलत प्रतीत होने वाली बात नहीं करना चाहता हूँ। आदरणीय डॉ. अम्बेडकर जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व के समक्ष मैं तो केवल एक तुच्छ सदस्य हूँ।

श्री राधेलाल व्यास (मध्य भारत) : लेकिन आप भी तो जाट हैं।

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चौ. रणबीर सिंह : क्यों नहीं, लेकिन मैं सरदार भूपिन्दर सिंह मान की तरह सिख जाट नहीं हूँ। मैं किसी भी विवाद में भाग नहीं लेना चाहता हूँ- जिसके कारणस्वरूप किसी का भी तिरस्कार हो-जैसे क्या हमारे रिवाज उनके रिवाजों से अच्छे हैं अथवा इस कार्यान्वयन का कोई उपयोग है अथवा नहीं। मैं सामान्यतः आपको हमारे रीति-रिवाजों से अवगत कराना चाहता हूँ जिसके कारण मेरे पुत्र का विवाह संबंध कम से कम 100 से 120 गाँवों तक में मैं नहीं कर सकता हूँ। इस प्रकार के मामले में, क्या छोटे शहरों और यहाँ तक कि बड़े नगरों में रहने वाली स्त्रियाँ उन कठिनाइयों और मुश्किलों का वास्तविक आकलन कर सकती हैं जिन का हम ऐसे विषयों के संबंध में विचार करते समय, सामना करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उनके लिए विवाह करना सामान्य मामले से अधिक कुछ और नहीं जिसे एक मुहल्ले से दूसरे मुहल्ले में भी किया जा सकता है।

पं. ठाकुर दास भार्गव : जहाँ तक इस विषय का संबंध है हिंदू कानून और आपके कानून में कोई अंतर नहीं है।

चौ. रणबीर सिंह : कानूनों में कोई अंतर नहीं हो सकता है लेकिन विकास में अंतर है। हमारे रिवाजों के अनुसार कुछ विशेष गोत्रों में हम वैवाहिक संबंध नहीं बना सकते हैं। कोई भी इस रिवाज के विरुद्ध जाने का साहस नहीं कर सकता है। यहाँ तक कि सबसे पिछड़े तबके का व्यक्ति, वर्तमान सामाजिक परिवेश के अनुसार ऐसे व्यक्ति को इसी प्रकार पिछड़ा तबका माना जाता है, यद्यपि भविष्य में हो सकता है कि उसे विकासशील कहा जाए- वह भी ऐसा कदम नहीं उठा सकता है। वास्तव में ऐसा कहने तक का, इतना साहस किसी ने नहीं पाया है। परन्तु, आज आप क्या कर रहे हैं, यदि मैं ऐसा कह सकता हूँ तो कानून द्वारा, ऐसा कदम उठाने के लिए, सीधे-सीधे एक व्यक्ति को योग्य करा दिया जाए।

श्री ए. सी. शुक्ल : वह क्या है जिसे माननीय सदस्य चाहते हैं?

चौ. रणबीर सिंह : मैं यह कहने नहीं जा रहा हूँ कि मैं क्या चाहता हूँ। मैं तो,