हिंदू कोड-जारी - Page 570

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विविध प्रचलित रीति-रिवाजों से सदन को अवगत कराना चाहता हूँ। इसीलिए तो मैं श्री भट्ट के संशोधन को मान लेने के लिए प्रार्थना कर रहा हूँ। अगले 10 वर्षों के दौरान के विकास का भली-भाँति अध्ययन किया जाना चाहिए, सत्य सदेव स्वयं को सही तरीके से प्रकट करेगा। यदि हमारी कार्यवाही सही होगी तो आप ऐसा कर पायेंगे अन्यथा हम वहीं कार्य करेंगे, मुझे विश्वास है।

इसलिए मैं इस तथ्य की ओर इशारा कर रहा था कि यहाँ तक कि वर्तमान समय में भी सगोत्र विवाह नहीं किए जा रहे हैं। परन्तु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इनके पीछे आदेशों और अधिनियमों का अत्यधिक दबाव है। मान लीजिए एक व्यक्ति इस कानून का सहारा लेते हुए समान गाँव अथवा समान गोत्र में विवाह करने का इच्छुक है, इसके क्या संभावित परिणाम होंगे? उसकी भी वही नियमित होगी जिसका मैंने पूर्व वर्णन किया था। इसका अर्थ यह नहीं कि मैं किसी भी प्रकार से चीजों को अतिशयोक्तिपूर्ण ढंग से बताना चाहता हूँ लेकिन फिर भी कृपया मुझे यह तथ्य उजागर करने दें कि मेरे विचार में हमारे वर्तमान समाज में गम्भीर त्रुटियाँ क्यों आयेंगी। यह मानते हुए कि मेरे परिवार का कोई उसी प्रकार से विवाह करना चाहता है, तो कोई भी इस मामले में मेरे विचारों पर ध्यान नहीं देगा। यदि मेरा भाई कोई ऐसी गलती करता है तो यह भी हो सकता है कि मेरा भी कत्ल करवा दिया जाए सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं भाग्यवश उसका भाई हूँ, इस तथ्य को भी जानने की कोई आवश्यकता नहीं समझेगा कि मेरी विचारधारा उसके अनुकूल थी अथवा विपरीत थी। मेरी विचारधारा स्पष्ट करने के लिए मुझसे कोई नहीं कहेगा। हमारे समाज में इसी प्रकार के मामलों की दुःखद स्थिति है। वास्तव में एक भाई की करनी से दूसरों का निर्णय लेना कितना आश्चर्यजनक लगता है। यहाँ, आपके समाज में, तीन भाई तीन विभिन्न धाराओं को मान सकते हैं-एक साम्यवादी बन सकता है, दूसरा समाजवादी और तीसरा कांग्रेसी बन सकता है। और अधिक सुस्पष्ट करते हुए, यदि यहाँ एक सदस्य भारतीय जनसंघ का सदस्य है तो उसके भाई के लिए कोई भी अन्य दल को अपनाने का मार्ग खुला हुआ है। परन्तु हमारे सामने की बातें पूर्णतः उलट हैं। यदि किसी परिवार विशेष का कोई व्यक्ति वहाँ कांग्रेस में जाता है तो पूरा परिवार स्वतः ही कांग्रेसी हो जायेगी इस तथ्य को बिना विचारे कि क्या ऐसा होना चाहिए अथवा नहीं। ऐसी है हमारे समाज की दशा। अब यह बोलना आपके ऊपर है आप उसे जो भी कहना चाहें प्रगति या कुछ और। मैं, ऐसी परिस्थितियों में, किसी के भी लिए हमारे समाज में एक-विवाह प्रथा के लिए उठ खड़ा हूँ। किसी देश में जैसा हमारा है; विशेषकर किसी एक समुदाय में जिससे मैं संबंध रखता हूँ जाट समाज में, एक-विवाह प्रथा ही विशेष रूप से आवश्यक है, हममें लड़कों की संख्या लड़कियों से अधिक है। एक व्यक्ति की दो पत्नियाँ केवल