हिंदू कोड-जारी - Page 573

558 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हुए, सदन में लाया गया। प्रथम स्थान पर, इसे प्रगतिशील उपाय बताया गया था; और द्वितीय रूप से, इसकी व्याख्या की गई थी कि यह विधान स्त्रियों को उनके देय अधिकारों को प्रदान कराने के लिए बहुत दूर तक जायेगा जिनसे उन्हें वंचित रखा गया है। पुरुष सदैव से ही स्त्रियों के साथ अन्याय करता चला आ रहा है और इस शोषण को दूर करने की दृष्टि से यह विधान लागू किया गया जाना चाहिए। अब, देखना यह है कि क्या यह विधान प्रगतिशील है। माननीय कानून मंत्री ने ‘प्रगतिशील’ शब्द की कोई भी परिभाषा नहीं दी है जो शायद उन विषयों में अन्तर स्पष्ट कर सकती जो प्रगतिशील हैं और जो प्रगतिशील नहीं हैं। इस पहलू से यह निश्चित होता है कि हिंदू धर्म अति प्राचीन धर्मों में से एक है और सच्चे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है जो स्वयं अकेला ही, इस सबके बावजूद कि उसने कितनी-कितनी नृशंसताएं सही हैं, जीवित रहने के लिए उत्तरदायी है। इस सुझाव का प्रत्युत्तर देने के लिए माननीय कानून मंत्री यह अभिव्यक्त करते हुए आनंदित हो रहे थे कि महात्मा बुद्ध ही ऐसे थे जिन्होंने धर्म, सत्य मार्ग को खोजा था। डॉ. अम्बेडकर ने बताया कि महात्मा बुद्ध स्त्रियों को पुरुषों द्वारा निरंतर शोषण होना और ऐसा करने से रोकने के लिए उनके कोई अधिकार न प्राप्त होने को सहन नहीं कर सके थे। इस बात को देखकर बुद्ध का दिल टूट गया था कि पुरुषों को स्त्रियों से अधिक अधिकार प्राप्त थे और उन पर हर प्रकार का अत्याचार कर रहे थे। यह एक जाति के साथ पक्षपात का व्यवहार था, माननीय कानून मंत्री ने आगे कहा था कि महात्मा बुद्ध द्वारा पुरुषों एवं स्त्रियों को एक समान मानने का उपदेश पहले-पहल दिया गया था। यहाँ माननीय डाक्टर का उद्धरण देते हुए मैं सामान्यतः यह प्रकट करना चाहता हूँ कि यह विधेयक प्रश्नवाचक रूप से बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार आगे लाया गया घोषित किया गया है। महात्मा बुद्ध एक महान व्यक्तित्व के धनी थे, निश्चित तौर पर धार्मिक-विचारधारा के थे। अब हम यह ध्यानपूर्वक अध्ययन करें कि वह क्या वास्तविक उद्देश्य था जिसे वे प्राप्त करना चाहते थे। यहाँ पर श्रीमान, मुझे याद पड़ता है कि महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर के दोहे के वास्तविक शब्द तो मुझे याद नहीं आ रहे हैं लेकिन इसका कुछ -कुछ अर्थ इस प्रकार से है कि एक मेंढक ने एक मधुमक्खी के साथ एक तालाब में प्रवेश किया जहाँ पर कमल के फूल पानी पर खिले हुए थे। मधुमक्खी कमल पर बैठ गई और उसने कमल का मकरंद चूस लिया; फिर वह मकरंद और सुगंध लेकर उड़ गई। लेकिन मेंढक अपने साथ, जिसने तालाब में मधुमक्खी के साथ ही प्रवेश किया था, केवल कुछ कीचड़ और गंदगी ही ला सका।

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श्रीमान, महात्मा बुद्ध ने उपदेश दिया था कि जितना अधिक हम अपने कुविचारों को वश में रखेंगे, उतना ही अधिक अच्छा रहेगा, चूँकि यह न केवल समाज के काम