हिंदू कोड-जारी - Page 574

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में आने के लिए सहायक सिद्ध होगा अपितु पूर्ण मानव समाज के लिए अधिक उत्तम रहेगा। यह उनके उपदेशों की विशिष्टता थी। परन्तु श्रीमान, यह कुछ अत्यधिक आश्चर्यजनक एवं दुःखद स्थिति भी है कि हमारे कानून मंत्री उनके प्रवचनों में से ऐसे कोई भी सुझाव नहीं समझ सके। वे केवल इतना ही तथ्य निकाल सके कि क्योंकि पुरुषों को बहु-विवाह का अधिकार प्राप्त है, इसलिए स्त्रियों को इसके अनुसार तलाक देने का अधिकार अवश्य होना चाहिए ताकि बाद के पड़ने वाले प्रभाव को निष्प्रभावित किया जा सके। श्रीमान् मेरा आपसे निवेदन है जैसा कि यहाँ के सदस्यों ने भी किया है, कि एक बार देख लें इस द्वारा किस तरह की समानता दी जाएगी।

डॉ. अम्बेडकर : क्या यह सब धारा 4 के तर्कसंगत है? हमें कुछ विषय की प्रासंगिकता का ध्यान रखना चाहिए। हमें प्रासंगिकता का नियम पूर्णतया छोड़ नहीं देना चाहिए।

पं. एम.बी. भार्गव : प्रासंगिकता कानून मंत्री का एकमात्र आधिपत्य नहीं है।

माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्यों से इस प्रश्न को मुझ पर छोड़ने का अनुरोध करता हूँ। माननीय मंत्रीजी ने मुझे यह निर्णय लेने के लिए कहा है।

पं. एम. बी. भार्गव : परन्तु उन्होंने स्वयं ही निर्णय घोषित कर दिया - उन्होंने इसे आपके सुपुर्द नहीं किया था।

डॉ. अम्बेडकर : प्रासंगिकता पर आपका भी आधिपत्य होना चाहिए - केवल मेरा ही नहीं।

माननीय अध्यक्ष : कोई भी प्रतिकूल प्रश्न-उत्तर नहीं पूछने चाहिएं। मैं पुनः माननीय सदस्यों से अपने-अपने ऊपर और अधिक आत्मसंयम रखने का अनुरोध करता हूँ। मैं माननीय सदस्य से, जो बोल रहे हैं उनसे अपने भाषण में अधिक प्रासंगिकता लाने के लिए कहना चाहूँगा।

श्री झुनझुनवाला : मेरा यह बताना कि समानता कहाँ है और हमें स्त्रियों को समान अधिकार कहाँ देना चाहिए, पूर्णतया प्रसंग के अनुसार था।

मेरे मित्र श्री ठाकुर दास भार्गव की टिप्पणी थी....

माननीय अध्यक्ष : मैं उन्हें अवश्य बताना चाहता हूँ कि इस समय यह वास्तविक मुद्दा नहीं है कि क्या समानता विद्यमान है अथवा नहीं है। वे रीति-रिवाजों व अन्य तथ्यों का हवाला दे सकते हैं, लेकिन समानता इस समय सीधा मुद्दा नहीं है। हमें उसको ध्यान में रखना चाहिए।