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रहे हैं। इस उपाय को सामने लाकर उनका इरादा हिंदू धर्म का उन्मूलन करना लगता है। हिंदू समाज और हिदू रीति-रिवाज व रस्में उनके द्वारा हिंदू समाज का नैतिक अपकर्ष लाना है। उनका प्रयोजन इसके अतिरिक्त कुछ प्रतीत नहीं होता है। पहले सम्पत्ति धारा लेते हुए और उस संबंध में यह देखते हुए कि स्त्रियों की दशा सुधरी है, हमें उनको ठोस छूट देनी चाहिए थीं बहुत से माननीय सदस्यों ने इसके लिए निवेदन किया था लेकिन हमारे कानून मंत्री लगातार असहमति प्रकट करते हुए सिर हिला रहे थे। वे शायद हमारे द्वारा अपनी स्त्रियों के लिए कुछ भी सुधार करने का सेहरा लेना नहीं पसन्द करते हैं जो उनके दुखों को कम करने में सहायता प्रदान करेंगे।
मैं अभी-अभी अपने मित्र श्री भार्गव के विचारों का हवाला दे रहा था कि तलाक एक ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने पसन्द नहीं किया और वास्तविक तौर पर कुछ ही लोगों ने इसका समर्थन किया था। इसका कारण है कि यह उचित बात नहीं है। मैं केवल आपको यह बोध कराना चाहता हूँ कि यदि तलाक लागू कर दिया जाए तो क्या हो सकता है। हमारे देश के नौजवान प्रतिदिन समाचार-पत्र में उस दिन तलाक लेने वाले लोगों की बहुत-सी खबरों को पढ़ रहे होंगे कि अमुक-अमुक व्यक्ति ने अपनी पत्नी अथवा पति से तलाक ले लिया। बिहार में मेरे मित्र श्री ब्रजकिशोर के गाँव से प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्र तथा उसमें भी जिसे श्री श्यामनंदन सहाय निकालने जा रहे हैं, ऐसे मामलों की रिपोर्ट आयेंगी और वे उन्हें पढ़ेंगे। सभी व्यक्तियों में से, श्री ब्रजकिशोर को तलाक में सबसे अधिक लाभ होता प्रतीत होता है। वे इन खबरों को बहुत चाव से पढ़ेंगे।
मुझे बल्कि क्षमा करें कि वे इस समय यहाँ उपस्थित नहीं हैं अन्यथा यदि वे जान जाते कि इस तरह की यहाँ चर्चा हो रही है तो वे बहुत अधिक क्रुद्ध हो जाते।
श्रीमान्, मैं निवेदन कर रहा था कि मेरे मित्र पण्डित ठाकुर दास भार्गव ने जो कहा था कि तलाक अच्छी चीज़ नहीं है परन्तु उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि उन्होंने इस सुझाव का क्यों पक्ष लिया। उन्होंने कहा था कि तलाक संबंधी धारा में इसे वैकल्पिक बनाने के लिए एक प्रावधान बढ़ाया जाना चाहिए था। उनके अनुसार यह अति महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने कहा था कि यही केवल अधिकार योग्य धारा है। परन्तु मैं कहना चाहूँगा कि बहुत-सी समर्थ बनाने वाली धाराएँ यहाँ नजरअंदाज कर दी गई हैं। माननीय उद्योग मंत्री और वाणिज्य मंत्री ने इस ‘अधिकार योग्य’ के अंतर्गत आने वाले सुझावों को अक्सर अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने यही बात कोका-कोला के बारे में भी कही थी। वे कहते हैं कि यदि इसे यहाँ पर ही बनाया जा रहा है तो इसे बनने दिया जाए; यह केवल अधिकार योग्य धारा है। इसी प्रकार