562 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से तलाक संबंधी यह धारा अधिकार योग्य धारा है। मैं पण्डित ठाकुर दास भार्गव से एक बात पूछना चाहूँगा। मान लीजिए एक पिता के दो पुत्र हैं जिनमें से एक की तीन विवाहित पत्नियाँ हैं। अब दूसरा भाई पिता के पास जाता है और कहता है कि यदि उसका भाई तीन विवाह कर सकता है इतना अधिक खर्च करता है, तब उसे क्या करना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर : उसे चार विवाह कर लेने चाहिए।
श्री झुनझुनवाला : पिता ने उत्तर दिया कि वह पाँच विवाह कर सकता है। इसलिए पण्डित ठाकुर दास के सिद्धांत के अनुसार, यदि एक पुत्र तीन पत्नियों से विवाह करता है तो दूसरे पुत्र को पाँच विवाह करने चाहिए। आखिरकार वही क्यों पीछे रहे? यही है वह अधिकार, जिसे वे देना चाहते हैं। परन्तु हमारे मित्र श्री श्यामनन्दन सहाय एक पक्के बनिया हैं। उनका क्या कहना है? यदि वह तीन विवाहित पत्नियाँ रखता है तो उसे तत्काल निकाल बाहर कर देना चाहिए।
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करूँगा कि जब एक-विवाह प्रथा के प्रश्न को लिया जाए तभी एक-विवाह प्रथा के प्रश्न को लिया जाए। अभी हम रीति-रिवाजों और नियमों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं और यह अधिक यथोचित रहेगा यदि वे स्वयं को केवल इस विषय तक ही सीमित रखें।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : उनका कहने का अर्थ यह सुझाव देना है कि एक पुत्र को तीन पत्नियों को तथा दूसरे पुत्र को पाँचों पत्नियों को तलाक दे देना चाहिए।
श्री झुनझुनवाला : श्रीमान् मैं आपके नियमानुसार चलूँगा और उनका दृढ़ता से पालन करूँगा परन्तु जैसा मैंने आरम्भ में निवेदन किया था....
माननीय अध्यक्ष : वे निश्चित रूप से इस धारा पर ही बोल सकते हैं।
श्री झुनझुनवाला : मैं विवाह की धारा पर चर्चा कर रहा था।
माननीय अध्यक्ष : विवाह की धारा पर नहीं, धारा 4 पर चर्चा हो रही है।
सरदार बी.एस. मान : सूचना के तौर पर। जबकि वर्तमान धारा पर चर्चा करते हुए और जब इसके प्रभाव स्वरूप विशिष्ट रिवाजों को निकाल दिया जाए, कुछ विशेष संशोधन प्रस्तुत किये जा रहे थे, हमें अपने मुद्दे को यह दिखाते हुए कि उन रिवाजों को ठोस कारणों से निकाला जाना चाहिए। ऐसे मामले में मेरा अनुमान है कि हम उन रीति-रिवाजों का उल्लेख करने के हकदार हैं जो हिंदू संहिता से भिन्न हैं और जो हमारे मुद्दे का आधार है कि जिन रिवाजों का लम्बा इतिहास