564 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : बैठ जाइये अन्यथा मैं चला जाऊँगा।
श्री झुनझुनवाला : आप जाइये, और मैं भी बैठ जाऊँगा।
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य से अपनी दलील जारी रखने के लिए कहना चाहूँगा।
श्री झुनझुनवाला : मैं अपनी दलील पर ही आ रहा हूँ परन्तु कानून मंत्री जो एक जिम्मेदार व्यक्ति है, अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि यह बात खत्म हो जाए और किसी प्रकार से भी सरकार का धन खर्च किया जाए। वे स्त्रियों को समान अधिकार प्रदान करने के इतने इच्छुक नहीं हैं। वे किसी तरह से भी सरकार का धन व्यय होते देखने के अधिक इच्छुक हैं ताकि बाहर के लोगों को यह पता लग जाए कि कानून मंत्री निकम्मे नहीं हैं।
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करूँगा कि वे इन प्रश्नों का उत्तर देने के स्थान पर अपनी दलील जारी रखें।
श्री झुनझुनवाला : श्रीमान्, मैं आपके नियमानुसार चलने को तैयार हूँ। लेकिन जब कोई माननीय सदस्य बीच में टोक देते हैं, तो आगे बोलना कठिन हो जाता है और पुनः उचित मुद्दे पर आने में समय लगता है।
डॉ. अम्बेडकर : घबराइये मत, वे सब आपके ही कामरेड हैं।
श्री झुनझुनवाला : कभी-कभी कामरेड भी साथ छोड़ देते हैं। आपकी तरह ही बहुत से कामरेड थे। आप स्वयं को ‘स्त्रियों’ के आंदोलन का सबसे बड़ा समर्थक प्रदर्शित करना चाह रहे थे लेकिन आखिरकार उनको छोड़ दिया।
अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी दलील पेश कर रहा हूँ परन्तु माननीय मंत्री विघ्न डाल रहे हैं।
सरदार बी.एस. मान : क्या कानून मंत्री के लिए विघ्नों को नजरअंदाज करना और इसका उत्तर न देना अशिष्ट नहीं लगेगा?
श्री झुनझुनवाला : उसके बाद एक दूसरा पहलू है जिसे मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँ। पण्डित ठाकुर दास भार्गव ने कहा था कि यदि किसी के दिए गए सुझाव से किसी प्रकार की हानि हो सकती हो और यदि कोई व्यक्ति कोई अनुचित कार्य कर रहा हो, तब दूसरों को भी वही कार्य करने के लिए कहना किस सीमा तक उचित है? स्त्रियों को पुरुषों के लिए गलत आचरण करने को कहना यदि पुरुष उसी