हिंदू कोड-जारी - Page 580

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प्रकार से आचरण कर रहें हों तो यह कहाँ तक सही है? मैं इसी पहलू को स्पष्ट करना चाहता हूँ।

फिर हम देखते हैं कि यह बात प्रगतिवादी है अथवा नहीं। इस समय हमारे माननीय गृहमंत्री, श्री राजाजी यहाँ उपस्थित नहीं हैं। उन्होंने प्रेस बिल को प्रवर समिति के पास भेजते समय कुछ टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि एक अनुच्छेद या उसके संबंध में एक व्यंग्यचित्र (मुझे भली-भाँति याद नहीं आ रहा है कि यह क्या था) किसी पृष्ठ पर दृष्टिगोचर हुआ था। जब उन्होंने इसे देखा तो इसे सबसे अधिक विद्रोही और साथ ही बहुत अश्लील पाया। वे जान नहीं पाए कि इसे प्रकाशित क्यों किया गया और उन्हें यह बहुत खला। परन्तु उन्होंने बताया जब उन्होंने उस दिन के समाचार-पत्र देखे, तो उन्हें लगा कि उस पत्र में ऐसा कुछ नहीं था जिससे उन्हें अप्रसन्नता होती। (व्यवधान)। मेरे माननीय मित्र मुझे टोकने के प्रयास कर रहे हैं।

माननीय अध्यक्ष : यदि आप अध्यक्ष पद को संबोधित करें तो शायद आपको यह असुविधा नहीं होगी।

श्री झुनझुनवाला : मैं बोलते समय चारों ओर देखने का आदी हूँ।

अतः उन्होंने कहा कि यह पूर्णतः निरर्थक था। उस दिन के प्रेस में छपे अनुच्छेदों और व्यंग्य-चित्रों की तुलना में वह किसी भी तरह से अश्लील नहीं लगा। उन्होंने कहा कि यह उन्हें फालतू-सा लगा। समाचार-पत्र हमें उन चीजों को देखने और पढ़ने के लिए बाध्य करते हैं जिन्हें हम देखना पसन्द नहीं करते हैं और देहाती नौजवान स्त्री-पुरुष उन्हें पढ़ते हैं। भगवान ही जानता है, कि हमारे नौजवानों पर उन चीजों का क्या प्रभाव पड़ रहा होगा। अब, मैं पूछना चाहता था कि क्या ये लेख आदि जो प्रेस द्वारा सामने आते हैं, प्रगतिवादी हैं और यदि वे प्रगतिवादी हैं तो क्या वे हमारे लिए लाभदायक सिद्ध होंगे? इसलिए मैं यह दर्शाना चाहता था कि हमारे कानून मंत्री जो कलियुग के मनु हैं....

श्री श्यामनंदन सहाय : कलियुग के मनु नहीं कलियुगी मनु।

श्री झुनझुनवाला : हम कलयुग में रह रहे हैं इसलिए मैंने उन्हें कलयुग के मनु कहा है। हमारे सम्मानीय मंत्री श्री गाडगिल जो स्वयं को जाति-बहिष्कृत ब्राह्मण समझते हैं और सोचते हैं कि वे पण्डित हैं उन्होंने उन्हें यह नाम दिया है। इस सबके कहने का मेरा अर्थ है कि वे इस युग के मनु हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यह प्रगतिवादी उपाय हमारे समाज को आगे बढ़ाने के लिए है अथवा गिराने व भ्रष्ट करने के लिए है। यदि उन्होंने मुझे मेरे संशोधनों को