हिंदू कोड-जारी - Page 583

568 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अधिनियम से जुड़े हुए किसी भी विषय के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, समाप्त कर दिए जायेंगे।’’

‘‘इस अधिनियम के लागू होने से तत्काल पूर्व लागू कोई भी अन्य कानून, जहाँ तक कि इस अधिनियम की व्यवस्था को प्रभावित करने से संबद्ध होगा, समाप्त हो जायेगा।

मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि मुझे इस कानून पर कोई आपत्ति नहीं है। यह पूर्णतः सही है परन्तु यदि ऐसा कुछ भी है जो किसी भी धर्म हिंदू, सिख और जैन धर्म के विरुद्ध है तो यह इस पर लागू नहीं होगा।

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श्री झुनझुनवाला : इस विधेयक की सीमा में मुसलमान नहीं आते हैं। फिर अगले संशोधन में, धर्म के स्थान पर नैतिकता है। आप कानून में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं कर सकते हैं, जिसका लोगों की नैतिकता पर प्रभाव पड़ता है और जो व्यवस्था उनके नैतिक पतन में वृद्धि करती है। यही है वह जिसे मैं कहना चाहता हूँ। इस संशोधन को जोड़ा जाना चाहिए। संविधान के अंतर्गत हमें यह अधिकार दिया जा चुका है। यदि इस संशोधन को स्वीकार नहीं किया जाता है तो मेरे विचार में हमारी सरकार हमारे धर्म की झूठी निन्दा और मिथ्यापवाद कर रही है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।

मेरा तीसरा संशोधन अनुच्छेद 29 पर आधारित है, जिसमें संस्कृति के संबंध में कहा गया है किः

‘‘29. (1) भारतसंघ में अथवा उसके किसी भाग में रहने वाले किसी भी समुदाय के नागरिकों को, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या अपनी संस्कृति है, उसके संरक्षण का अधिकार होगा।’’

मेरा निवेदन है कि यदि यह अधिनियम, हमारी संस्कृति अथवा हिंदू, सिख, जैन संस्कृति अथवा हिंदुओं के किसी भी वर्ग को प्रभावित करता है अथवा इसका विरोध करता है तो उन परिस्थितियों में लागू नहीं किया सकता।

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(अध्यक्ष की कुर्सी पर उपाध्यक्ष हैं)

अतः सदन के समक्ष इन तीनों संशोधनों को प्रस्तुत करते समय मैं माननीय सदस्यों से अपने संशोधनों को पहले स्वीकार करने और पश्चात् धारा को स्वीकृति देने की गुजारिश करता हूँ। प्रथम बार में मैंने उनसे धारा को किसी भी प्रकार से पारित न करने के लिए कहा था लेकिन यदि वे इसे पारित करते हैं तो मेरे संशोधनों