हिंदू कोड-जारी - Page 584

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को भी इसके साथ ही मंजूरी मिलनी चाहिए। अब मैं अधिक समय न लेते हुए यही समाप्त करना चाहूँगा।

एक माननीय सदस्य : बंद करें, महोदय।

श्री भारती : मैं प्रस्ताव रखता हूँ कि अब प्रश्न रखा जाए। बहुत से माननीय सदस्यगण : नहीं; नहीं।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य कृपया अपना स्थान ग्रहण करें। सदन के समक्ष मैं प्रश्न रखूँगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : उसके पूर्व, महोदय, मैं निवेदन करता हूँ कि हमने संशोधन प्रस्तुत किए थे। हमें उन पर बोलने का अधिकार है। उन पर कहने के लिए हमारे पास कुछ है। हमारे संशोधनों की विशेषताओं पर चर्चा होनी चाहिए।

माननीय उपाध्यक्ष : मुझे स्वीकार है।

श्री श्यामनंदन सहाय : एक और अनुरोध है महोदय आपने अभी-अभी घोषित किया था कि श्री झुनझुनवाला के पश्चात् श्री भट्ट बोलेंगे और उसके बाद, आप निश्चित करेंगे कि क्या किया जाना चाहिए।

माननीय उपाध्यक्ष : मैंने जरा भी आशा नहीं की थी कि माननीय सदस्य श्री झुनझुनवाला इतना अधिक समय ले लेंगे। उनका संशोधन तो बहुत ही कम है। उन्होंने बहुत अधिक समय ले लिया। मैंने सोचा था कि उतने समय में दो माननीय सदस्य बोल सकेंगे। कल से विशेषकर इस धारा पर विचार-विमर्श चल रहा था। जहाँ तक इस धारा का संबंध है, यदि यह अकेली होती, तो मैं किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाता। हमने इस विस्तारपूर्वक धारा की परिभाषा पर विचार-विमर्श किया कि रीति-रिवाज क्या है, इसके संघटक क्या हैं, और अन्य तथ्य। दोनों को एक साथ लेते हुए, मैं अनुभव करता हूँ कि चर्चा पर्याप्त रूप से हो गई है। इसलिए, मैं सदन के समक्ष प्रस्ताव रखूँगा। सदन की इसकी स्वीकृति या अस्वीकृति देने दें।

श्री भट्ट : मेरे नाम से भी एक संशोधन है।

श्री श्यामनंदन सहाय : जैसा कि श्री नजीरुद्दीन ने कहा था, हमने संशोधन प्रस्तुत कर दिए हैं। हम धारा 2 पर भी बोलना चाहते थे। आखिरकार, आप यदि आज इस धारा को पारित कर देते हैं, तो यह मुद्दा यहीं समाप्त नहीं हो जाता है। यहाँ पर तो चर्चा के लिए 50 या 55 धाराएँ हैं। इसीलिए, मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ। यह अति महत्वपूर्ण धारा है क्योंकि यहाँ हम निर्धारित करते हैं