हिंदू कोड-जारी - Page 586

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किसी विषय पर हो सकता है भली-भाँति विचार-विमर्श हो चुका हो परन्तु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हमें उन लोगों को एक भी अवसर नहीं देना चाहिए जो अपनी बात अभी तक नहीं कह पाए हैं। इसीलिए, मेरा आपसे नम्र निवेदन है कि कृपया इस पर चर्चा जारी रखें।

श्री भारती : महोदय, परिस्थितियों को पूर्णतः ध्यान में रखते हुए यह पूरे तौर पर आपके स्वनिर्णय पर निर्भर करता है। हम....

श्री श्यामनंदन सहाय : मेरा अध्यक्ष महोदय से केवल इतना ही निवेदन है कि चूँकि अभी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें अभी अपनी....

डॉ. अम्बेडकर : पहले ही पर्याप्त चर्चा हो चुकी है और (शोर) महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि यह निश्चित करने के लिए कि क्या इस चर्चा को समाप्त कर देना चाहिए अथवा नहीं, मुद्दा यह नहीं है कि प्रत्येक वह सदस्य जो बोलना चाहता था क्या अपना मत प्रकट कर चुका है। मुद्दा है कि क्या पर्याप्त विचार-विमर्श हो चुका है अथवा नहीं।

श्री श्यामनंदन सहाय : लेकिन प्रत्येक उस सदस्य को, जो बोलना चाहता था, बोलने की अनुमति दे देनी चाहिए। और महोदय, आपने स्वयं ही कहा था कि इस व्यवस्था को धारा के प्रासंगिक बनाने के लिए आप, मुझे मेरे संशोधन को प्रस्तुत करने की अनुमति देंगे।

पंडित मालवीय : जबकि एक सदस्य सही मायने में अपने वक्तव्य के बीच में हो तो मेरे विचार में प्रश्न इस बात से कुछ भिन्न हो जाता है जैसा यह तब था जब सामान्यः चर्चा को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा जाता है।

माननीय उपाध्यक्ष : लेकिन अभी कोई भी सदस्य नहीं बोल रहा है।

पंडित मालवीय : यह महत्वपूर्ण विषय है। आप देखें कि जो लोग बोलना चाहते थे उन्होंने इस विषय पर अभी तक नहीं बोला है।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्यों को यह बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि-और माननीय कानून मंत्री द्वारा भी इसका उल्लेख किया गया है- कि ऐसा नहीं है यदि प्रत्येक उस सदस्य को जो किसी संशोधन या प्रस्ताव पर अपना वक्तव्य देना चाहता था, एक अवसर दिया ही जाए।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : लेकिन वे लोग जिनके द्वारा संशोधन के प्रस्ताव रखे गए हैं?