खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 59

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ख्वाजा इनायत उल्ला (बिहार) : क्या ये संशोधन जो मुसलमानों को भी हिंदू संहिता के अंदर लाने के लिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं और अनुच्छेद 25 के अंदर हमारे मौलिक अधिकारों के विरुद्ध निर्देशित हैं?

माननीय अध्यक्ष : यह प्रश्न नहीं उठता। यह फिर से एक विस्तारित प्रश्न मात्र है कि क्या संहिता अपने आप में संविधान की भावना के विरुद्ध है।

ख्वाजा इनायत उल्ला : यह स्पष्ट है.....

माननीय अध्यक्ष : यह माननीय सदस्य को स्पष्ट हो सकती है, लेकिन मुझे स्पष्ट नहीं है। इसलिए हमें माननीय सदस्य को सुनना चाहिए। अनुमानों पर जाने से कोई लाभ नहीं। आखिरकार यह मुद्दा व्यक्तियों के बड़े समूह को प्रभावित करता है। प्रश्न यह है कि क्या यह संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध है।

श्री जे. आर. कपूर : इससे पहले कि आप इस प्रश्न पर कि क्या ये संशोधन ठीक है या नहीं, के लिए नियम बनाएँ। क्या मैं आप से यह निवेदन कर सकता हूँ कि हमें इस विशेष मुद्दे पर बोलने का अवसर दें, क्योंकि अभी तक हम में से किसी ने भी इस संशोधन की प्रविष्टि की स्वीकृति के बारे में अपनी बात नहीं रखी है।

माननीय अध्यक्ष : मेरे विचार से मुझे उन्हें अवसर देना चाहिए। लेकिन सबसे पहले मैं यह सुनना चाहता हूँ : वास्तव में उनका क्या मतलब है और क्या वे इस विधेयक का क्षेत्र विस्तारित करना चाहते हैं। मैं उन्हें सुनँगा।

श्री झुनझुनवाला : मैं सदन से निवेदन कर रहा था कि अगर एक विशेष प्रकार का विधेयक सुधार के लिए है या जनहित में है, तो इस संसद को ऐसा विधेयक बनाने में भेदभाव नहीं बरतना चाहिए।

kkx Zo
v è; {k
d h
d ql

जब एक विशेष प्रकार का विधेयक लोगों के कल्याण के लिए बनाया जा रहा है उसको एक विशेष लोगों के वर्ग तक ही क्यों सीमित किया जाना चाहिए और उसका विस्तार सभी तक क्यों नहीं किया जाना चाहिए? अगर यह अच्छा है तो अच्छा है; अगर बुरा है तो बुरा है। और अगर यह खराब है तो हमें उसको हिंदुओं पर भी क्यों लागू करना चाहिए? हम उसको हिंदुओं पर भी क्यों लादें? उनको क्यों स्वतंत्र नहीं छोड़ देना चाहिए कि वे अपने धर्म के अनुसार व्यवहार करें। और अपने पुराने विचारों के अनुसार चलें। यह कहा गया है कि यह विधेयक इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि वर्तमान विवाह और अन्य बातों की प्रणाली समाज के हित में नहीं है, कि इसमें समाज खराब हो रहा है और यह विशेष प्रकार का विधेयक समाज के हित में है। अगर एक विशेष प्रकार का विधेयक शादी के बारे में हो सकता है,